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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 655, कुल 788 में से

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पृष्ठ 655

प्रति हॉब्स की पक्षधरता धर्मशास्त्रीय न होकर, धर्मनिरपेक्ष और तर्कसंगत थी। वह
समुदाय (पूरी समष्टि) के सुख को सरकार का महान लक्ष्य मानता था।
( मनुष्य एक असामाजिक प्राणी )
हॉब्स का दर्शन सिनिकवादी है। उसके अनुसार, मनुष्य के मनोवेग स्वाभाविक
रूप से उसके निजी संरक्षण और सुख की दिशा में ही निर्दिष्ट होते हैं, और वह
उनकी प्राप्ति के अलावा और कोई उद्देश्य नहीं रखता। अतः मनुष्य स्वभाव से
असामाजिक है। वह कहता है, “प्राकृतिक अवस्था में, हरेक आदमी अपने
जैसों से युद्धरत रहता है, और हरेक का जीवन ख़तरे में, अकेला, असहाय,
असुरक्षित, पशुवत और अल्पकालिक होता है।” इस प्रकार के जीवन का भय
ही उसे राजनीतिक एकता में बँधने के लिए विवश करता है।
( लगातार ख़तरा उन्हें राज्य गठित करने पर विवश करता है! )
चूँकि महज पैक्ट काम नहीं देता, इसलिए ‘एक सर्वोच्च सर्वमान्य सत्ता’ –
“सरकार” की स्थापना
( “जीत” या “अधिग्रहण” और “संस्थाबद्धता” सभी राज्यों के एकमात्र
आधार )
समाज की स्थापना “अधिग्रहण” अर्थात जीत द्वारा या “संस्थाबद्धता”
द्वारा, मसलन, पारस्परिक समझौते या क़रार द्वारा, होती है। इस प्रकार, एक बार
जब सम्प्रभु सत्ता क़ायम हो जाती है, तब सभी को इसका आज्ञाकारी होना
आवश्यक हो जाता है। इससे विद्रोह करने वाले किसी भी व्यक्ति को ख़त्म कर
दिया जाना चाहिए। उसे तबाह कर दिया जाना चाहिए।
( सम्प्रभु शासक की असीमित सत्ता! )
वह¹ विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के सारे के सारे अधिकार
सम्प्रभु शासक के हवाले कर देता है। वह लिखता है, “प्रभावी होने के लिए सम्प्रभु
सत्ता को निश्चय ही असीमित, अहस्तान्तरणीय और अविभाज्य होना चाहिए। बेशक
असीमित सत्ता गड़बड़ियों को जन्म दे सकती है, लेकिन सबसे इसका बुरा से बुरा
रूप भी उतना बुरा नहीं है जितना कि गृहयुद्ध या अराजकता।
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उसके विचार से राजशाही, कुलीनतन्त्र, या जनतन्त्र में सत्ता को लेकर कोई

  1. हॉब्स
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 649