भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 653, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंवह इस बात पर अरस्तू से सहमत था कि सरकार की उत्पत्ति राजतन्त्र से
हुई। लेकिन वह यह भी कहता है कि 'क़ानून सिर्फ़ भलाई की शिक्षा ही नहीं
देते, बल्कि एक बाध्यकारी शक्ति भी रखते हैं, जो शासितों की सहमति से प्राप्त
होती है, और जो या तो व्यक्तिगत तौर पर या प्रतिनिधियों के मार्फ़त प्रदर्शित होती
है।'
“क़ानून, चाहे जिस किसी भी क़िस्म के मनुष्यों के लिए हों, वे उनकी
सहमति से ही उपलब्ध (अर्थात वैध) होते हैं।”
“वे क़ानून क़ानून नहीं हैं जो जनता के अनुमोदन से नहीं बनाये गये होते हैं।”
“जनता की सम्प्रभुता”
इस प्रकार उसने स्पष्ट तौर पर कहा कि सम्प्रभुता या क़ानून-निर्मात्री सत्ता
अन्ततः जनता में ही निहित होती है।
1620 :
मेफ़्लावर (1620) पर सवार “पिलग्रिम फादर्स”¹ की मशहूर घोषणा :
“ईश्वर को साक्षी मानकर हम सब मिलकर एक दूसरे क़रार की घोषणा करते हैं
और अपनेआप को एक नागरिक राजनीतिक निकाय के रूप में संयुक्त करते हैं।”
1647 :
इंग्लैण्ड की जनता का क़रार : एक और मशहूर प्यूरिटन² दस्तावेज़, जो आर्मी
ऑफ़ द पार्लियामेण्ट ( 1647 ) से निःसृत हुआ, सोच की इसी प्रवृत्ति का संकेत
देता है।
मिल्टन³
1649 (जनता की सम्प्रभुता)⁴
अपनी कृति “टेन्योर ऑफ़ किंग्स एण्ड मैजिस्ट्रेट्स” (1649) में वह भी ऐसे
ही सिद्धान्तों का प्रतिपादन करता है। वह दावे के साथ कहता है कि “सभी मनुष्य
प्राकृतिक रूप से स्वतन्त्र ही पैदा हुए थे।” वे एक “सामान्य संघ के रूप में
एक-दूसरे के साथ बँधने के लिए इसलिए सहमत हुए कि वे एक-दूसरे को क्षति
- पिलग्रिम फ़ादर्स : इंग्लैण्ड के चर्च के प्यूरिटन विद्रोहियों का एक जत्था जो परेशान किये
जाने से बचने तथा उत्तरी अमेरिका में जा बसने के लिए, मेफ़्लावर नामक जहाज़ से भाग
निकला। - प्यूरिटन : प्रोटेस्टेण्ट ईसाई सम्प्रदाय का सदस्य
- जॉन मिल्टन (1608-1674) : अंग्रेज़ कवि। पैराडाइज लॉस्ट और पैराडाइज रिगेन्ड के
रचयिता - मोटे अक्षरों में हाशिये पर दर्ज
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 647