भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 652, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंनिरपेक्ष सत्ता” है। उसने सम्प्रभुता की अपनी धारणा और उस समय की
मौजूद राजशाही के बीच घालमेल कर दिया।
अल्थूसियस (1557-1638)¹: वह स्पष्ट रूप से यह कहने के लिए जाना
जाता है कि सम्प्रभुता एकमात्र जनता में ही निहित होती है। राजा सिर्फ़ उसका
मजिस्ट्रेट या प्रशासकभर होता है, और कि समुदाय का सम्प्रभुता का अधिकार
अहस्तान्तरणीय होता है।
ग्रोटियस (1625)²: अपनी कृति “डि ज्यूरे बेली एट पेरिस” (1628) में
ग्रोटियस कहता है कि मनुष्य में एक शान्तिप्रिय और व्यवस्थित समाज की
प्रबल इच्छा होती है। लेकिन वह अ-प्रतिरोध का सिद्धान्त विकसित करता है,
और इस बात से इन्कार करता है कि लोग हमेशा और हर जगह सम्प्रभुता
सम्पन्न होते हैं अथवा यह कि सारी सरकारें शासितों के लिए गठित होती
हैं। सम्प्रभुता या तो विजय से आती है या सहमति से, लेकिन वह इस धारणा पर
ज़ोर देता है कि सम्प्रभुता अविभाज्य सत्ता है।
हूकर : वह अपनी कृति ‘एक्लेसियस्टिकल पालिटी’ – खण्ड 1
(1592-3) में प्रकृति की एक ऐसी मौलिक दशा को स्वीकार करता है जिसमें
सभी मनुष्य बराबर थे और किसी भी क़ानून के मातहत नहीं थे। मानवोचित गरिमा
के अनुकूल जीवन की इच्छा और एकाकीपन के प्रति अरुचि ने उन्हें ‘राजनीतिक
समाजों’ में एकबद्ध होने के लिए प्रेरित किया। ‘प्राकृतिक रुझान’ और एक साथ
जीवन जीने की उनकी एकबद्धता के तौर-तरीक़े पर प्रत्यक्ष या गुप्त सहमति से
चलने वाली व्यवस्था ही वर्तमान ‘राजनीतिक समाजों’ के दो बुनियादी आधार बने।
इनमें से दूसरे आधार को ही हम “सामान्य हित के क़ानून” कहते हैं।
पृष्ठ 172 (107) राज्य की उत्पत्ति
सम्प्रभुता : विधायी सत्ता का
कार्यपालिका पर भी नियन्त्रण
‘सभी आपसी शिकायतों, क्षतियों और ग़लतियों को दूर करने के लिए एकमात्र
तरीक़ा किसी क़िस्म की सरकार, या सर्वमान्य न्यायकर्ता की व्यवस्था करना ही
था।’
- जोहान्स अल्थूसियस (1557-1638) : एक जर्मन विधिवेत्ता और डच गणराज्य की
सीमा पर स्थित एक इम्पीरियल शहर एमडैन का चीफ़ मजिस्ट्रेट - ह्यूगो ग्रोटियस (1583-1645) : डच विधिवेत्ता और राजनीतिज्ञ। उसकी पुस्तक
अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का सबसे पहले निरूपण करने वाली कृति मानी जाती है।
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