भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 647, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंसम्प्रभुता के मामले में, नागरिक कोमिटिया ट्रिब्यूरा¹ में एकत्र होकर, गणतन्त्र
के स्वर्णिम दिनों में, सर्वोच्च सत्ता के रूप में काम करते थे।
साम्राज्य के अन्तर्गत, सम्प्रभु सत्ता सम्राट में निहित थी, और बाद के ज्यूरिस
कंसल्ट्स के अनुसार, जनता लेक्स रेजिया² के अनुसार, सर्वोच्च कमान प्रत्येक
सम्राट को, उसके शासन के शुरू होते ही, सौंप देती थी, और इस प्रकार शासन
करने और क़ानून बनाने के अपने सारे अधिकार उसे सौंप देती थी।
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मध्य युग
(टॉमस एक्विनास)
टॉमस एक्विनास³ : (1226-1274) के बारे में कहा जाता है कि वह मध्य
युग के राजनीतिक सिद्धान्त का प्रमुख प्रवर्तक था। उसने, रोमन विधिवेत्ताओं का
अनुसरण करते हुए, एक प्राकृतिक क़ानून को मान्यता दी, जिसके सिद्धान्त मानवीय
विवेक में दैवीय रूप से निविष्ट किये गये (माने गये – स.) और इसके साथ ही
उसने उन प्रत्यक्ष क़ानूनों को भी मान्यता दी, जो भिन्न-भिन्न राज्यों में भिन्न-भिन्न
हुआ करते थे।
उसका कहना था कि क़ानून बनाने वाली सत्ता, जोकि सम्प्रभुता की अनिवार्य
विशेषता होती है, सामान्य कल्याण की दिशा में निर्देशित होनी चाहिए, और कि
इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए, इसे बहुसंख्यक जनता या उसके प्रतिनिधि,
राजा, से सम्बद्ध होना चाहिए। उसे राजा, कुलीनों, और जनता की
मिली-जुली सरकार सर्वोत्तम प्रतीत होती थी जिसमें सर्वोच्च सत्ता के रूप में पोप
हो।
पादुआ का मार्सिलिओ⁴
(1328 में निधन)
समझौते की धारणा
अपनी कृति ‘डिफेंसर पैसिस’ में पादुआ के मार्सिलिओ ने लोकाधारित
- राजकीय या शाही कमेटी, जो सम्राट द्वारा गठित की जाती थी।
- राजकीय क़ानून
- टॉमस एक्विनास (1226-1274) : इतालवी दार्शनिक
- पादुआ का मार्सिलिओ (मृत्यु 1328 ई.) : इटली के पादुआ शहर का निवासी
राजनीतिक सिद्धान्तकार जिसने चर्च और राज्य को एक-दूसरे से पृथक करने को लेकर
बादशाह लुई चतुर्थ के लिए डिफेंसर पैसिस ग्रन्थ लिखा, जो काफ़ी विवादास्पद सिद्ध हुआ।
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 641