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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 646, कुल 788 में से

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रोमन राज्य-व्यवस्था
रोमनों ने राजनीतिक सिद्धान्त में कम ही ऐसा इज़ाफ़ा किया गया जिसका
प्रत्यक्ष महत्त्व हो, लेकिन एक घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित विभाग, यानी विधिशास्त्र
में – उन्होंने गहरी रुचि वाला और मूल्यवान योगदान किया।
गणतन्त्र के अन्तर्गत, “नागरिक क़ानून” (जस-सिविक)
जस-सिविक के अतिरिक्त, जस-जेण्टियम (राष्ट्र के क़ानून) नाम से
जस-जेण्टियम ढेरों नियम और सिद्धान्त अस्तित्व में आ चुके थे, जो इतालवी
क़बीलों के बीच प्रचलित सामान्य विशेषताओं को प्रतिबिम्बित करते थे।
महान रोमन ज्यूरिस-कंसल्ट्स (क़ानून-विज्ञान के विशेषज्ञ)
जस नेचुरेल (स्तोइकवादियों के विचार से प्रेरणा लेकर) धीरे-धीरे प्रकृति
के क़ानून (जस नेचुरेल) को जस-जेण्टियम के समरूप मानने लगे।
उनकी शिक्षा थी कि यह क़ानून दैवीय और शाश्वत था, और कि यह किन्हीं
विशिष्ट राज्यों के क़ानूनों से अपनी भव्यता और वैधता में कहीं अधिक श्रेष्ठ था।
प्राकृतिक क़ानून को वास्तव में अस्तित्वमान माना जाता था, और इसे नागरिक
क़ानून से सम्बद्ध समझा जाता था।
एण्टोनियाई काल¹ में, जब रोमन क़ानून अपना चरम विकास कर चुका था
और स्तोइकवादी सिद्धान्त सर्वाधिक प्रभावी हो चुके थे, तब विधिवेत्ताओं ने
राजनीतिक सिद्धान्तों के रूप में नहीं, बल्कि न्यायशास्त्रीय रूप से, यह सिद्धान्त
सूत्रबद्ध किया कि :
“सारे मनुष्य जन्मजात स्वतन्त्र होते हैं।”
और कि प्रकृति के क़ानून से, “सारे मनुष्य समान होते हैं” – जिसका
निहितार्थ यह था कि भले ही नागरिक क़ानून में वर्ग-भेद की मान्यता थी, प्रकृति
के क़ानून के समक्ष समूची मानवजाति बराबर थी।
रोमन राज्य व्यवस्था में सामाजिक समझौता :
यद्यपि रोमन विधिवेत्ताओं ने नागरिक समाज की उत्पत्ति के तौर पर किसी
समझौते को स्वीकार नहीं किया था फिर भी स्वीकृत अधिकारों और दायित्वों को
एक कल्पित, लेकिन ग़ैर-मौजूद समझौते से निगमित करने की एक रुझान मौजूद
थी।

  1. रोमन सम्राट एण्टोनियस पायस (86-161 ई.) का शासनकाल (138-161 ई.)। उसका
    शासनकाल शान्ति और उत्तम प्रशासन का काल माना जाता है।
    640 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़