भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 645, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकी एक तरकीबभर है।
स्टोइक : (वाद)
दार्शनिक ज़ेनो (340-260 ई.पू.)¹ का एक शिष्य, जिसने एथेंस के ‘स्टोआ
पॉइकलाइट’ (पेण्टेड पोर्च) नामक बग़ीचे में अपनी दार्शनिक शाखा का
शिक्षण-संस्थान खोला। बाद में कैटो द यंगर², सेनेका³, मार्क्यूस ऑरिलियस⁴ रोमन
स्टोइकवादी हुए। स्टोइक शब्द का शाब्दिक अर्थ है : ‘वह व्यक्ति जो सुख या दुख
के प्रति विरक्त हो।’
स्टोइकवाद पुराने दर्शन की एक शाखा है, जो जीवन और कर्तव्य के प्रति
अपने दृष्टिकोण में एपीक्यूरसवाद का प्रबल विरोधी है; और सुख या दुख के प्रति
उदासीन है।
सिनिकवाद :
दार्शनिकों का एक सम्प्रदाय जिसकी स्थापना एथेंस के एण्टीस्थेनीज⁵ (जन्म
444 ई.पू.) ने की थी, जिसकी अभिलाक्षणिक विशिष्टता धन-दौलत, कला,
विज्ञान और आमोद-प्रमोद के विरुद्ध एक प्रकट घृणा के रूप में थी। इन्हें सिनिक
इनके रूखे व्यवहार के कारण कहा जाता है। सिनिकवाद कभी-कभी मानव-
स्वभाव के प्रति तिरस्कार भावना के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
एपीक्यूरसवादी :
एपीक्यूरस (341-270 ई.पू.) एक यूनानी दार्शनिक था, जिसकी शिक्षा थी
कि सुख ही असली चीज़ है। एपीक्यूरसवादी उसे कहा जाता है जो खाओ-पीओ
और मौज-मस्ती में विश्वास करता है।
- ज़ेनो : यूनानी दार्शनिक, जो आत्मसंयम और प्रकृति की संगति में जीवन जीने का हिमायती
था। - कैटो द यंगर (95-46 ई.पू.) : रोमन दार्शनिक जो स्टोइकवादियों का संरक्षक सन्त बना।
- सेनेका : पूरा नाम ल्यूसियस एनीयस सेनेका (4 ई.पू.-65 ई.) : रोमन लेखक और
राजनीतिज्ञ तथा रोमन सम्राट नीरो का शिक्षक, जिसने स्टोइकवाद पर कई निबन्ध और दुखान्त
नाटक भी लिखे। थोड़े समय के लिए वह एक तरह से रोम का शासक भी रहा, फिर बाद
में आत्महत्या करने की सज़ा मिली। - मार्कस आरेलियस एन्तोनियस : (121-180 ई.) : रोमन दार्शनिक और सम्राट
(161-180 ई. तक)। उसने मेडिटेशंस नाम से एक क्लासिकीय स्टोइकवादी ग्रन्थ लिखा। - एण्टीस्थेनीज़ (444-365 ई. पू.) : सुकरात से प्रभावित यूनानी दार्शनिक। उसके सादगी
भरे जीवन और शिक्षाओं ने ग़रीबों को आकर्षित किया।
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 639