भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 642, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 165 (100)
राज्य का विज्ञान
प्राचीन राज्य व्यवस्था : रोम¹ और स्पार्टा,² अरस्तू³ और प्लेटो⁴ : राज्य के प्रति
व्यक्ति की मातहती इन प्राचीन राज्य व्यवस्थाओं, स्पार्टा और रोम की प्रमुख
विशेषता थी। हेलास⁵ में, या रोम में, नागरिक को बस थोड़े से निजी अधिकार प्राप्त
थे। उसका आचरण काफी हद तक सार्वजनिक सेंसरशिप के अधीन था, और
उसका धर्म राज्यसत्ता द्वारा लागू किया गया होता था। एकमात्र सच्चे नागरिक और
सम्प्रभुतासम्पन्न निकाय के सदस्य विशेषाधिकार प्राप्त कुलीन वर्ग के मुक्त लोग
होते थे, जिनके लिए शारीरिक श्रम दास किया करते थे, जिनके पास कोई नागरिक
अधिकार न थे।
सुकरात :
सुकरात⁶ को यह दलील देते हुए प्रस्तुत किया जाता है कि जो कोई भी
नागरिक राज्य में पहुँचने के बाद, यदि स्वेच्छा से एक नगर में रहने लगे, तो उसे
सरकार की मातहती स्वीकार करनी चाहिए, भले ही उसे इसके क़ानून अनुचित
क्यों न लगें, तदनुसार ही, इस आधार पर कि यदि वह जेल से फ़रार होकर भाग
जाये, तो राज्य के साथ उसका क़रार भंग हो जायेगा, वह एक अनुचित सज़ा के
लागू होने का भी इन्तज़ार करते रहने के लिए तैयार रहे।
प्लेटो : (सामाजिक समझौता)
वह समाज और राज्य की उत्पत्ति को पारस्परिक आवश्यकताओं में देखता है,
क्योंकि मनुष्य अलग-अलग रहकर अपनी बहुविध आवश्यकताओं को तुष्ट करने
में असमर्थ होते हैं। वह एक क़िस्म के आदर्शीकृत स्पार्टा का चित्रण करते हुए
कहता है, “एक आदर्श राज्य में, दार्शनिकों को शासन करना चाहिए, और नागरिकों
के निकाय को इस कुलीन तन्त्र या सर्वश्रेष्ठों की सरकार के प्रति निश्चित रूप
- प्राचीन रोमन गणराज्य और साम्राज्य
- यूनान का प्राचीन नगरराज्य
- अरस्तू (384-322 ई.पू.) : यूनानी दार्शनिक और प्लेटो का शिष्य। उसने बहुतेरे विषयों
पर लिखा, जिनमें से पालिटिक्स और पोयटिक्स विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। - प्लेटो (427-347 ई.पू.): यूनानी दार्शनिक और सुकरात का शिष्य, और आदर्श राज्य
के यूटोपिया के तौर पर, रिपब्लिक का लेखक, जिसमें उसने एक दार्शनिक राजा और
विवेकसम्मत राज्य-व्यवस्था की कल्पना की थी। - हेलास : प्राचीन यूनान
- सुकरात (469-399 ई. पू.) : यूनानी दार्शनिक जिसे नौजवानों को “भ्रष्ट करने” के
आरोप में जहर का प्याला पीकर आत्महत्या कर लेने की सज़ा दी गयी।
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