भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 637, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंएक स्पार्टावासी माँ के पाँच बेटे सेना में थे। एक दास आया। काँपते हुए
उसने समाचार पूछा। “तुम्हारे पाँचों बेटे मार डाले गये।”
“तुच्छ दास, क्या तुमसे मैंने यह पूछा था?”
“हमने विजय हासिल कर ली है”। वह देवताओं को धन्यवाद देने के लिए
दौड़ी-दौड़ी मन्दिर चली गयी।
वह एक सच्ची नागरिक थी।
– एमिली, पृष्ठ 8¹
जीवन और शिक्षा :
लोग सिर्फ़ अपने बच्चे की ज़िन्दगी की सलामती के ही बारे में सोचते रहते
हैं, लेकिन इतना ही काफ़ी नहीं है, अगर वह मनुष्य है तो उसे स्वयं भी अपनी
ज़िन्दगी की सलामती के बारे में शिक्षित होना ज़रूरी है, ताकि वह भाग्य के थपेड़ों
को सह सकें, सम्पदा और ग़रीबी का बहादुरी से मुक़ाबला कर सके, ज़रूरत पड़ने
पर आइसलैण्ड की बर्फ़ के बीच या माल्टा की तपती चट्टानों पर निवास कर
सकें। बेकार ही तुम मौत के ख़िलाफ़ खैर मनाते हो, उसे मरना तो है ही, और भले
ही तुम अपनी सतर्कताओं के चलते उसे न मरने देना चाहो, लेकिन यह मुगालता
ही है।
उसे मौत से बचने के बजाय जीने की शिक्षा दो! जीवन साँस लेना
नहीं बल्कि कर्म है। अपनी इन्द्रियों का, अपने दिमाग़ का, अपनी क्षमताओं का,
और अपने अस्तित्व को चेतन बनाये रखने वाले प्रत्येक भाग का इस्तेमाल करना
है। जीवन का अर्थ उम्र की लम्बाई में कम, जीने के बेहतर ढंग में अधिक
है। एक आदमी सौ वर्ष जीने के बाद क़ब्र में जा सकता है, लेकिन उसका
जीना निरर्थक भी हो सकता है। अच्छा होता कि वह जवानी में ही मर गया
होता।
– एमिली, पृष्ठ 10
पृष्ठ 118 (91)
सत्य :
सत्य कोई खज़ाना नहीं प्रदान करता, और जनता कोई राजदूत या प्रोफ़ेसर का
- एमिली – फ़्रांसीसी दार्शनिक ज्याँ जाक रूसो (1712-1778) का उपन्यास (1762)
जिसमें यह सिद्धान्त निरूपित किया गया है कि बच्चे को सभ्यता के बुरे प्रभावों से बचाने के
लिए प्राकृतिक वातावरण में विकास का पूर्ण अवसर दिया जाना चाहिए।
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 631