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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 633, कुल 788 में से

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पृष्ठ 633

पृष्ठ 112 (85)
न्याय : राज्य की भौतिक ताक़त के जरिये एक राजनीतिक समुदाय के भीतर
अधिकार बनाये रखना।
इसने उस व्यक्तिगत प्रतिशोध का स्थान ले लिया है, जब लोग ग़लतियों का
प्रतिशोध स्वयं या अपने बन्धु-बान्धवों के सहयोग से ले लिया करते थे। उन दिनों,
'जिसकी लाठी उसकी भैंस' का सिद्धान्त काम करता था।
दीवानी और फ़ौजदारी न्याय :
नागरिक न्याय अधिकार लागू करता है। फ़ौजदारी न्याय ग़लतियों के लिए सज़ा
देता है।
एक आदमी अपने बकाये का, या उससे ग़लत ढंग से दबा ली गयी सम्पत्ति
को फिर से वापस पाने का दावा करता है। यह दीवानी (न्याय का मामला) है।
फ़ौजदारी के मामले में, प्रतिवादी पर ग़लत करने का आरोप लगा होता है।
अदालत इस मुल्ज़िम को कर्तव्य की अवहेलना के जुर्म में तथा अधिकार के
उल्लंघन के जुर्म में, सज़ा देती है, जिसमें यदि हत्या का जुर्म है तो फाँसी और
यदि चोरी का जुर्म है तो जेल की सज़ा देती है। [पृष्ठ 113 (86) पर जारी]
दीवानी और फ़ौजदारी, दोनों ही प्रकार की कार्रवाई में, ग़लती की शिकायत
दर्ज की जाती है।
दीवानी (कार्रवाई) में अधिकार का दावा किया जाता है,
फ़ौजदारी (कार्रवाई) में ग़लती का आरोप लगाया जाता है।
दीवानी न्याय का सरोकार, प्राथमिक तौर पर, वादी और उसके अधिकारों से
होता है,
फ़ौजदारी (न्याय) का प्रतिवादी और उस पर लगे आरोप से।
फ़ौजदारी न्याय के उद्देश्य
सज़ा :
यह तटस्थ 'अपराधकर्ताओं' जैसे राजनीतिक व्यक्तियों के मामलों में उपयोगी
नहीं हो सकती। यह उनके लिए एक बुरा सौदा सिद्ध हो सकती है।

  1. निवारक : क़ानून का प्रमुख उद्देश्य दोषी व्यक्ति को एक नज़ीर बनाना
    और उस जैसे बाक़ी सभी व्यक्तियों को एक चेतावनी देना है। यह प्रत्येक अपराध
    को "अपराधकर्ता की एक दुर्भावना" सिद्ध करता है। (इरादे का बदलाव)
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 627