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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 632, कुल 788 में से

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पृष्ठ 632

ख़िलाफ़ किये जाने वाले जुर्मों की ख़ासियत यह होती है कि यदि उनमें मुजरिम
क़ामयाब हो जाता है, तो वह सज़ा से तक़रीबन साफ़ बच जाता है। क़ातिल क़त्ल
करने के बाद, क़त्ल करने की अपेक्षा कहीं अधिक ख़तरे में होता है, लेकिन
राजद्रोही जब सरकार का तख़्ता पलट देता है, तो वह ख़तरे से बाहर हो जाता है।
चूँकि दण्डात्मक क़ानून एक क़ामयाब विद्रोही के विरुद्ध नपुंसक ही सिद्ध होता
है, इसलिए ज़रूरी है कि इसे विद्रोह की पहली शुरुआत के ख़िलाफ़ ही सशक्त
और कड़ा बनाया जाये...।"
(II एल.सी.सी. जजमेण्ट 1906, पृष्ठ 120)¹

पृष्ठ 111 (84)

सज़ा :
स्वप्न जो प्राणदण्ड का कारण बना : जब मार्सेंज ने सपना देखा कि उसने
डायोनीसियस² का गला काट दिया है, तब निरंकुश शासक ने उसे प्राणदण्ड दे
दिया, जिसके पीछे उसकी दलील यह थी कि यदि उसने दिन में ऐसा सोचा न
होता तो रात में यह सपना कदापि नहीं देखता।
प्राणदण्ड और ड्रैको का क़ानून : ड्रैको³ के क़ानून में लगभग सभी प्रकार
के जुर्मों, जैसे मामूली चोरी से लेकर धर्म-द्रोह और हत्या तक के लिए एक समान
मौत की सज़ा का विधान था, और कहा जाता है कि इसका एकमात्र स्पष्टीकरण
जो ड्रैको ने दिया था, वह यह कि छोटे-मोटे जुर्मों की तो यही सज़ा होनी चाहिए
और बड़े जुर्मों के लिए इसे बड़ी सज़ा वह सोच नहीं सका।
सज़ा को बहुतेरे दार्शनिकों ने एक आवश्यक बुराई माना है।
राज्य और मनुष्य : राज्य अपनेआप में कोई लक्ष्य नहीं है, और मनुष्य क़ानून
या राज्य के लिए नहीं, बल्कि ये ही मनुष्य के लिए होते हैं।

  1. स्रोत और विवरण अनुपलब्ध
  2. डायोनीसियस द एल्डर (430-367 ई. पू.) : सिसली का यूनानी राजनेता, जो 400
    ई.पू. में साइरेक्यूस का निरंकुश शासक बना।
  3. ड्रैको (ई.पू सातवीं सदी) : एथेंस (यूनान) का राजनीतिज्ञ जिसने परम्परागत अलिखित
    संविधान को संहिताबद्ध किया, छोटे से लेकर, बड़े तक सभी प्रकार के जुर्मों के लिए प्राणदण्ड
    देने के लिए कुख्यात उसका क़ानून (ड्रैकनियन लॉ) आज भी ऐसे काले क़ानूनों के लिए
    मुहावरे के तौर पर इस्तेमाल होता है।
    626 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़