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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 625, कुल 788 में से

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पृष्ठ 625

✓ जनसमुदाय :
“जनता एक ऐसे भारी-भरकम और पंचमेल जानवर की भाँति होती है, जो
अपनी ही ताक़त से अनभिज्ञ रहता है और इसीलिए बोझ ढोते हुए कोड़े-डण्डे
खाता रहता है। यह उस फ़ितने बच्चे द्वारा भी हाँक लिया जाता है, जिसे वह जब
चाहे धक्के मारकर फेंक सकता है। लेकिन यह उस बच्चे से डरता है और इसीलिए
यह उसकी सारी सनकों और मनबहकियों को झेलता रहता है, और कभी महसूस
नहीं करता कि वह बच्चा खुद उससे कितना डरता है...। अद्भुत है! लोग खुद अपने
ही हाथों से अपनेआप को फाँसी दे देते हैं और खुद ही जेल चले जाते हैं तथा खुद
ही अपने ऊपर युद्ध और मौत का कहर बरपा कर लेते हैं। किसलिए? बस एक
दमड़ी के लिए, जो उन्हीं तमाम दमड़ियों में से एक होती है जिन्हें वे खुद ही राजा
को दे चुके होते हैं। जबकि धरती और आकाश के बीच जो कुछ है सब तो उनका
ही है, लेकिन वे इसे नहीं जानते और अगर उन्हें कोई यह बता दे तो वे उस आदमी
को गिराकर मार डालेंगे।
तोमासो कैम्पानेला¹
पृष्ठ 102 (75)
“मार्क्सवाद बनाम समाजवाद”
(1908-12) लेखक व्लादिमीर जी. सिखोविच
पीएच.डी., कोलम्बिया विश्वविद्यालय
वह एक-एक करके मार्क्स के सारे सिद्धान्तों की आलोचना करते हैं और इन
सभी को ख़ारिज करते हैं :

  1. मूल्य का सिद्धान्त
  2. इतिहास की आर्थिक व्याख्या
  3. सम्पदा का थोड़े से हाथों, अर्थात पूँजीपतियों के हाथों में संकेन्द्रण, मध्यम
    वर्ग का पूरी तरह ख़ात्मा और सर्वहारा वर्ग की बाढ़
  4. बढ़ती ग़रीबी का सिद्धान्त, जिसकी परिणति के तौर पर
  5. आधुनिक राज्य और सामाजिक व्यवस्था का अपरिहार्य संकट।
    वह निष्कर्ष निकालते हैं कि मार्क्सवाद सिर्फ़ इन्हीं मूलभूत सिद्धान्तों पर
    आधारित है, और उन्हें एक-एक करके ख़ारिज करते हुए, निष्कर्ष के तौर पर कहते
    हैं कि क्रान्ति के जल्दी फूट पड़ने की सारी धुँधली आशंकाएँ अभी तक निर्मूल
    ही साबित हुई हैं। मध्यम वर्ग घट नहीं, बल्कि बढ़ रहा है। धनी वर्ग संख्या में बढ़
  6. तोमास्सो कैम्पानेला (1568-1639) : इतालवी कवि और दार्शनिक
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 619