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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 626, कुल 788 में से

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रहा है, तथा उत्पादन और उपभोग की प्रणाली भी परिस्थितियों के अनुसार बदल
रही है, अतः मज़दूरों की दशा में सुधार करके किसी भी प्रकार के संघर्ष को टाला
जा सकता है। सामाजिक अशान्ति का कारण बढ़ती ग़रीबी नहीं, बल्कि औद्योगिक
केन्द्रों पर ग़रीब वर्गों का संकेन्द्रण है, जिसके नाते वर्ग-चेतना पैदा हो रही है।
इसीलिए यह सब चिल्ल-पों है।¹
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लेस मिज़रेबल्स की भूमिका
जब तक क़ानून और परम्परा की बदौलत एक ऐसी सामाजिक अधोगति मौजूद
रहेगी जिसमें सभ्यता के भीतर नर्क निर्मित होते रहेंगे और दैवीय नियति के साथ
मानवीय नियति का उलझाव होता रहेगा, जब तक इस युग की तीन समस्याएँ
ग़रीबी के कारण मनुष्य की दुर्गति, भूख के कारण नारी की अधोगति, और अज्ञानता
के कारण बच्चों की अशक्तता – हल नहीं होतीं, जब तक कुछ क्षेत्रों में सामाजिक
घुटन मौजूद रहेगी – दूसरे शब्दों में, तथा एक और भी व्यापक दृष्टिकोण से –
जब तक इस धरती पर अज्ञानता और बदहाली बरक़रार रहेगी, तब तक ऐसी
किताबें व्यर्थ नहीं सिद्ध होंगी।
“विक्टर ह्यूगो”²
न्यायाधीश “न्यायाधीश (अपने फ़ैसले से) जो कष्ट पहुँचाता है, यदि
की परिभाषा : वह स्वयं उसके प्रति निष्ठुर हो, तो वह न्याय करने का
अधिकार खो बैठता है।”
“रवीन्द्रनाथ ठाकुर”³
“लेकिन अप्रतिरोधी शहादत जो कर पाने में असफल रह जाती है, उसे
न्यायप्रिय और प्रतिरोधी शक्ति कर डालती है, तथा अत्याचारी को और अधिक
हानि पहुँचाने में नाकाम कर देती है।”⁴

  1. भगतसिंह द्वारा पुस्तक पर दर्ज टिप्पणी
  2. विक्टर ह्यूगो (1802-1885) : फ़्रांसीसी कवि, नाटककार, उपन्यासकार और रोमांसवाद
    के एक प्रवर्तक; लेस मिजरेबल्स उनका 1862 में लिखा एक क्लासिकीय उपन्यास है।
  3. माँ की प्रार्थना नामक कविता की पंक्तियाँ
  4. अज्ञात
    620 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़