भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 623, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंअक्षम नेता :
...ऐसे नेताओं की दो क़िस्में हैं जो पार्टी को ऐसे वक़्त पीछे खींचने की रुझान
रखते हैं, जब उसे सबसे तेज़ गति से आगे बढ़ने की ज़रूरत होती है। एक क़िस्म
ऐसे नेताओं की है जिनकी प्रवृत्ति क्रान्ति के रास्ते में हमेशा ही बेपनाह कठिनाइयाँ
और बाधाएँ देखने की होती है, और जो उन्हें देखकर – सचेत या अचेतन तौर पर
– उनसे बचने की इच्छा रखते हैं। ये मार्क्सवाद को तोड़-मरोड़कर इस रूप में
व्याख्यायित करने लगते हैं कि क्रान्तिकारी कार्रवाई क्यों असम्भव है।
दूसरे क़िस्म के नेता महज सतही आन्दोलनकर्ताभर होते हैं। वे जब तक
बाधाओं से टकराकर अपना सिर नहीं फोड़ लेते, तब तक उन्हें कभी बाधाएँ नज़र
ही नहीं आतीं। वे समझते हैं कि बस भाषण झाड़ कर ही वास्तविक कठिनाइयों
से निजात पा लेंगे। वे प्रत्येक चीज़ को अति आशावाद के साथ देखते हैं, और जब
सचमुच कुछ करने को होता है, तब ठीक उसी वक़्त पाला बदल लेते हैं।
पृष्ठ 80¹
पृष्ठ सं. 75 से 100 नोटबुक की हमें उपलब्ध हुई प्रति में नहीं थे।
अगली पृष्ठ अं. 101 (74) है। – सम्पादक
<u>पृष्ठ 101 (74)</u>
समाजशास्त्र²
मूल्य :
“1 पाव मक्का = क/ लोहे की क़ीमत। यह समीकरण हमें क्या बताता है?
यह हमें बताता है कि दो भिन्न-भिन्न चीज़ों में – मक्का पावभर में और लोहे की
क क़ीमत में – समान गुणों वाली कोई चीज़ दोनों में उभयनिष्ठ रूप से मौजूद
है। अतः इन दो चीज़ों को अवश्य ही किसी ऐसी तीसरी चीज़ के बराबर होना
चाहिए, जो स्वयं न तो पहली चीज़ हो, और न ही दूसरी चीज़...। अब आइये हम
इन दोनों उत्पादों में से प्रत्येक के भीतर निहित इस तीसरी अवशिष्ट चीज़ पर विचार
करें, यह प्रत्येक उत्पाद में, एक ही अभौतिक यथार्थ के रूप में, एकसार मानवीय
श्रम, यानी उस श्रम शक्ति के महज एक जमाव के रूप में निहित है, जिसमें इससे
- सम्भवतः लेसंस ऑफ़ अक्टूबर 1917 से ही
- हाशिये पर नोट किया हुआ
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 617