भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 622, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ें“सोवियतों की कांग्रेस का इन्तज़ार करना औपचारिकताओं का एक बचकाना खेल
खेलना है, औपचारिकताओं के साथ एक अपमानजनक खेल खेलना है, यह क्रान्ति
के साथ विश्वासघात करना है।”
उपयुक्त क्षण :
राजनीति में समय एक महत्त्वपूर्ण कारक है, और युद्ध एवं क्रान्ति में तो यह
हज़ारों गुना अधिक महत्त्वपूर्ण है। चीजें जो आज की जा सकती हैं, कल नहीं की
जा सकतीं। हथियार लेकर उठ खड़े होना, दुश्मन को पराजित करना, सत्ता पर
क़ब्ज़ा करना, आज सम्भव हो सकता है, और कल असम्भव हो सकता है। लेकिन
आप कह सकते हैं कि सत्ता पर क़ब्ज़ा करने का मतलब तो इतिहास की धारा
को बदल डालना होता है, और क्या यह सम्भव है कि एक ऐसी चीज़ महज 24
घण्टे की देरी पर निर्भर हो? हाँ, जब सशस्त्र जन-विद्रोह की घड़ी आ जाती है,
तब घटनाएँ राजनीति के लम्बे पैमानों से नहीं, बल्कि युद्ध के छोटे पैमानों से नापी
जाती हैं। इसमें कुछेक हफ़्ते, कुछेक दिन, या यहाँ तक कि कभी-कभी एक दिन
की देरी का मतलब क्रान्ति का परित्याग हो सकती है, घुटने टेक देना हो सकता
है।
राजनीतिक चालबाज़ी, ख़ासतौर से क्रान्ति में, हमेशा ख़तरनाक होती है। आप
दुश्मन को धोखा दे सकते हैं, लेकिन इससे आपके पीछे चलने वाले जनसमुदाय
दिग्भ्रमित हो सकते हैं।
पृष्ठ 74 (71)
हिचकिचाहट :
नेताओं की ओर से दिखायी जाने वाली, और उनके अनुयायियों द्वारा महसूस
की जाने वाली हिचकिचाहट राजनीति में आमतौर पर नुक़सानदेह साबित होती है,
और सशस्त्र जन-विद्रोह की स्थिति में तो यह एक घातक ख़तरा है।
युद्ध
...“युद्ध युद्ध है”, चाहे जो भी हो, इसमें कोई हिचकिचाहट या वक़्त की
बरबादी नहीं होनी चाहिए।¹
- उपरोक्त सभी उद्धरण सम्भवतः त्रात्स्की की किताब लेसंस ऑफ़ अक्टूबर 1917 से हैं।
616 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़