भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 621, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंजन-विद्रोह का विरोध करने लगते हैं, अपने विरोध को उचित ठहराने के लिए
सैद्धान्तिक दलीलें खोजने लगते हैं, और उन्हें ये दलीलें, अपने कल के विरोधियों
के बीच, एकदम पके-पकाये तौर पर, मिल भी जाती हैं।
त्रात्स्की 19¹
पृष्ठ 72 (69)
“अब ज़रूरत इस बात कि है कि हम अपनेआप को पुराने फ़ार्मूलों से नहीं,
बल्कि नयी वास्तविकताओं से निर्देशित करें।”
लेनिन (पृष्ठ25)²
वह हमेशा ही भविष्य के लिए अतीत से लड़ते रहे।
पृष्ठ 41³
...लेकिन एक क्षण ऐसा आता है जब सोचने की यह आदत, कि दुश्मन
अधिक बलवान है, विजय के लिए मुख्य बाधा बन जाती है।
त्रात्स्की पृष्ठ 48⁴
...लेकिन ऐसी परिस्थितियों में हरेक पार्टी के पास अपना लेनिन तो होगा नहीं।
...महत्त्वपूर्ण क्षण को गँवा देने का क्या मतलब होता है?...
रणकौशलों की सारी कला इसी में है, कि जब परिस्थितियों का संयोग
सर्वाधिक अनुकूल हो तो उस क्षण के अनुरूप कार्रवाई की जाये...।
परिस्थितियों ने ऐसा ही संयोग उपस्थित किया था और लेनिन ने कहा था कि
संकट को किसी न किसी पक्ष में हल करना ज़रूरी है। लेनिन ने बार-बार कहा,
‘अभी या कभी नहीं’।
पृष्ठ 52⁵
पृष्ठ 73 (70)
एक क्रान्तिकारी पार्टी की ताक़त एक निश्चित सीमा तक बढ़ती है, लेकिन
उसके बाद इसका उल्टा भी हो सकता है...।⁶
“हिचकिचाना अपराध है”...अक्टूबर की शुरुआत में...(लेनिन ने)...लिखा,
1., 2., 3., 4. और 5. त्रात्स्की की किताब लेसंस ऑफ़ अक्टूबर 1917 से
6. आख़िरी शब्द मूल में अस्पष्ट; लेसंस ऑफ़ अक्टूबर 1917 से
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 615