भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 620, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंजनता की आवाज़ :
हमें जितनी सरकारों के बारे में जानकारी है, वे सबके सब मुख्य रूप से,
जनता के प्रति उदासीन रहकर ही शासन करती रही हैं, वे हमेशा ही देश के
राजनीतिक रूप से सचेत इस या उस तबके की, अल्पसंख्यक सरकारें ही रही हैं।
लेकिन जब यह दैत्य (यानी जनता – स.) जाग जायेगा, तो उसी की मर्ज़ी लागू
होगी, लेकिन सबसे बड़ी बात है कि यह समय से जागेगा या नहीं।
भूमिका$^1$
पृष्ठ 71 (68)
लेनिन ने जुलाई, 1917 में लिखा, “यह अक्सर होता है कि जब घटनाएँ
अचानक मोड़ ले लेती हैं, तो एक अग्रणी पार्टी भी कुछ समय तक के लिए इस
नयी परिस्थिति के साथ अपनी सुसंगति नहीं बना पाती। वह वे ही पुराने जुमले
दोहराती रहती है, जो इस नयी परिस्थिति में अर्थहीन हो चुके होते हैं, तथा जिस
अनुपात में घटनाओं में 'अप्रत्याशित' परिवर्तन हो चुका होता है, उसी अनुपात में
उनकी अर्थवत्ता भी 'अप्रत्याशित रूप से' ख़त्म हो चुकी होती है।
लेसंस ऑफ़ अक्टूबर (पृष्ठ 17)$^2$
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रणकौशल और रणनीति :
जैसे युद्ध में, वैसे ही राजनीति में भी, रणकौशल का अर्थ है अलग-अलग
कार्रवाई का संचालन करने की कला; रणनीति का अर्थ है विजय पाने की, अर्थात
सत्ता पर वास्तविक क़ब्ज़ा करने की कला।
(पृष्ठ 18)$^3$
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प्रचार और कार्रवाई :
और जब सर्वहारा वर्ग की पार्टी तैयारी से, यानी प्रचार और संगठन एवं
आन्दोलन से, आगे बढ़कर सत्ता के लिए वास्तविक संघर्ष में उतरती है और बुर्जुआ
वर्ग के विरुद्ध एक वास्तविक जन-विद्रोह को अंजाम देने लगती है, तब एक
अत्यन्त अचानक बदलाव घटित होता है। ऐसे में पार्टी के भीतर ऐसे तत्त्व जो
दृढ़संकल्प नहीं रखते, या संदेहशील, या समझौतावादी, या कायर होते हैं – वे
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- वही
- और 3. 1926 में प्रकाशित त्रात्स्की की पुस्तक लेसंस ऑफ़ अक्टूबर 1917 से
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