भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 614, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 61 (58)
अधिनायकत्व :
अधिनायकत्व एक सत्ता है जो सीधे ताक़त पर आधारित होती है, और किसी
क़ानून से नहीं बँधी होती।
सर्वहारा वर्ग का क्रान्तिकारी अधिनायकत्व एक ऐसी सत्ता है जो बुर्जुआ वर्ग
के विरुद्ध और उसके ऊपर, सर्वहारा वर्ग द्वारा ताक़त की बदौलत लागू की जाती
है, और जो किसी क़ानून से नहीं बँधी होती।
प्रोलि. रिवो.¹ (पृष्ठ 18) – लेनिन
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क्रान्तिकारी अधिनायकत्व :
क्रान्ति एक कार्रवाई है जिसके तहत आबादी का एक तबका दूसरे तबकों
पर रायफलों, संगीनों, बन्दूकों और ऐसे ही अन्य अत्यन्त सत्तावादी उपायों के
जरिये, अपनी इच्छा आरोपित करता है। और जो पक्ष विजयी होता है वह अपना
शासन आवश्यक रूप से, उस भय के जरिये स्थापित करता है, जिसे उसके
हथियार प्रतिक्रियावादियों में उत्पन्न करते हैं। यदि पेरिस के कम्यून ने बुर्जुआ वर्ग
के ख़िलाफ़ हथियारबन्द जनता पर भरोसा नहीं किया होता, तो क्या वह
अपनेआप को चौबीस घण्टे से भी अधिक क़ायम रख सका होता? इसके
विपरीत, क्या हमारी यह आलोचना जायज़ नहीं है कि कम्यून ने इस सत्ता का
बहुत ही कम इस्तेमाल किया?
– एफ. एंगेल्स ²
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बुर्जुआ जनतन्त्र :
बुर्जुआ जनतन्त्र, सामन्तवाद की तुलना में, एक महान ऐतिहासिक प्रगति होने
के बावजूद, एक बहुत ही सीमित, बहुत ही पाखण्डपूर्ण संस्था, धनिकों के लिए
एक स्वर्ग और शोषितों एवं ग़रीबों के लिए एक जाल और छलावे के अलावा न
तो कुछ है, और न ही हो सकता है।
लेनिन (पृष्ठ 28)³
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- लेनिन, सर्वहारा क्रान्ति और ग़द्दार काउट्स्की से
- फ्रेडरिक एंगेल्स, सत्ता के बारे में से
- वही
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