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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 613, कुल 788 में से

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पृष्ठ 613

आदमी को मशीन पर कुर्बान नहीं किया जा सकता। मशीन को निश्चय ही
मानवजाति की सेवा में लगना चाहिए, जबकि अभी ही इस औद्योगिक व्यवस्था
में मानवजाति के ऊपर भारी कहर बरपा होने का ख़तरा मँडराने लगा है।
पॉवर्टी एण्ड रिचेज़ (पृष्ठ 81), स्काट नीअरिंग ¹
पृष्ठ 60 (57)
आदमी और मशीनरी :
सी. नैनफ़ोर्ड हेण्डरसन अपनी कृति “रे डे” में लिखता है :
यह उद्योग की संस्था, जो सभी संस्थाओं में सबसे पुरानी है, मानवजाति को
चीज़ों की निरंकुशता से मुक्त करने की गरज से संगठित और विकसित हुई, लेकिन
अब यह स्वयं उससे बड़ी निरंकुशता बन चुकी है, जो विशाल आबादी को गुलामों
की दशाओं में – ऐसे गुलामों की दशाओं में धकेलती जा रही है जो लम्बे और
थका देने वाले घण्टों तक काम करते हुए, ढेरों चीजें पैदा करते रहने के लिए
अभिशप्त हैं, जबकि वे जो चीजें पैदा करते हैं, खुद उन्हीं के अभाव से त्रस्त रहने
के लिए विवश हैं।
“पाव. रिचेज़, (पृष्ठ 87) ”
आदमी मशीनरी के लिए नहीं है :
आदमी ने इस्पात और आग के संयोग से जो चीज़ पैदा की है और जिसे मशीन
कहा है, उसे निश्चय ही हमेशा मनुष्य का स्वामी नहीं, बल्कि सेवक ही रहना
चाहिए। न तो मशीन और न ही मशीन के मालिक को मानवजाति पर शासन करने
का अधिकार है। पृष्ठ 88
साम्राज्यवाद :
साम्राज्यवाद विकास के उस चरण का पूँजीवाद है जिसमें इज़ारेदारियों और
वित्तीय पूँजी ने एक प्रभुत्वकारी प्रभाव हासिल कर लिया है, निर्यात-पूँजी भारी
महत्त्व प्राप्त कर चुकी है, अन्तरराष्ट्रीय ट्रस्टों ने दुनिया का बँटवारा करना शुरू कर
दिया है, और सबसे बड़े पूँजीवादी देशों ने पृथ्वी के समूचे भौगोलिक क्षेत्रफल
का आपस में बँटवारा पूरा कर लिया है।” – लेनिन ²

  1. स्कॉट नीअरिंग (1883-1983) : अमेरिकी पर्यावरणवादी, युद्धविरोधी कार्यकर्ता,
    प्रचारक और लेखक। पॉवर्टी एण्ड रिचेज़ 1916 में प्रकाशित हुई थी।
  2. वी.आई. लेनिन, साम्राज्यवाद, पूँजीवाद की चरम अवस्था
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 607