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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 607, कुल 788 में से

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पृष्ठ 607

पृष्ठ 53 (50)
सत्ता...¹
एक समाजवादी नेता ने धनिकतन्त्र की एक मीटिंग को सम्बोधित किया और
उन पर समाज के कुप्रबन्ध का दोष लगाया और इस प्रकार पीड़ित मानवता के
सम्मुख उपस्थित सभी विकरालताओँ और दुख-तकलीफ़ों की सारी की सारी
ज़िम्मेदारी उन्हीं पर थोप दी। बाद में एक पूँजीपति (मि. विक्सन) उठ खड़ा हुआ
और उसे इस प्रकार सम्बोधित किया :²
“इस पर हमारा जवाब यह है। हमारे पास तुम्हारे ऊपर बरबाद करने के लिए
शब्द नहीं हैं। जब तुम अपने गर्वीले मज़बूत हाथ हमारे महलों और वैभव की ओर
बढ़ाओगे, तब हम तुम्हें दिखा देंगे कि हमारी क्या ताक़त है। बमगोलों की
गड़गड़ाहट और मशीनगनों की तड़तड़ाहट से हम अपना जवाब देंगे। हम तुम
क्रान्तिवादियों को अपनी एड़ियों तले पीस डालेंगे, और तुम्हारे चेहरों को कुचल
डालेंगे। यह दुनिया हमारी है। हम इसके मालिक हैं और यह हमारी ही रहेगी। जहाँ
तक श्रम की बात है, यह तो जब से इतिहास शुरू हुआ तभी से धूल चाटता रहा
है, और मैंने इतिहास को ठीक से पढ़ा है। और यह तब तक धूल चाटता रहेगा जब
तक हमारे और हमारे उत्तराधिकारियों के हाथ में सत्ता रहेगी।
“एक शब्द है – सत्ता। यह सभी शब्दों का राजा है। ईश्वर नहीं, धन-वैभव
नहीं, बल्कि सत्ता। अपनी ज़बान पर रख लो और तब तक रखे रहो जब तक कि
यह उसे झनझनाने न लगे।”
“मुझे उत्तर मिल गया”, अर्नेस्ट (उस समाजवादी नेता)³ ने निर्विकार भाव
से कहा। “एकमात्र यही उत्तर दिया भी जा सकता था। सत्ता। हम मज़दूर वर्ग
के लोग इसी का तो प्रचार करते हैं। हम जानते हैं और अपने कटु अनुभव से
भलीभाँति जानते हैं, कि सत्य की, न्याय की, मानवता की, कोई भी अपील
कभी तुम्हें छू नहीं सकती। तुम्हारे दिल भी तुम्हारी उन एड़ियों की तरह ही
कठोर हैं जिनसे तुम ग़रीबों के चेहरे कुचलते हो। इसीलिए तो हमने सत्ता का
प्रचार किया है। लेकिन, चुनाव के दिन हमारे मतपत्रों की ताक़त तुमसे तुम्हारी
सरकार छीन ले जायेगी...।”
“अगर चुनाव के दिन तुम्हें बहुमत, भारी बहुमत मिल ही जाये, तो भी
उससे क्या फ़र्क पड़ने वाला है”, मि. विक्सन तपाक से बोला।

  1. शीर्षक का शेष हिस्सा फटा हुआ है
  2. भगतसिंह के शब्द
  3. कोष्ठक में भगतसिंह के शब्द
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 601