भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 592, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंएक क्रान्तिकारी के दिमाग़ की बनावट :
“जो व्यक्ति कभी भी ईसा मसीह के जीवन से प्रभावित रहा है, जिन्होंने एक
आदर्श के नाम पर पीड़ा, अपमान और मृत्यु का वरण किया; जिसने उन्हें कभी
एक आदर्श तथा उनके जीवन को अनासक्त प्रेम की प्रतिमूर्ति माना है – वही उस
क्रान्तिकारी के दिमाग़ की बनावट को समझ सकता है जिसे सज़ा दी गयी है, और
जनता की आज़ादी के लिए काम करने के जुर्म में जीवित ही मक़बरे में डाल दिया
गया है।” (वेरा एन. फ़िग्नर)
अधिकार :
अधिकार माँगो नहीं। बढ़कर ले लो। और उन्हें किसी को भी तुम्हें देने मत
दो। यदि मुफ़्त में तुम्हें कोई अधिकार दिया जाता है तो समझो कि उसमें कोई न
कोई राज़ ज़रूर है। ज़्यादा सम्भावना यही है कि किसी ग़लत बात को उलट दिया
गया है।¹
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कोई दुश्मन नहीं?
तुम कहते हो, तुम्हारा कोई दुश्मन नहीं?
अफ़सोस! मेरे दोस्त, इस शेख़ी में दम नहीं,
जो शामिल होता है फ़र्ज़ की लड़ाई में,
जिसे बहादुर लड़ते ही हैं
उसके दुश्मन होते ही हैं। अगर नहीं हैं तुम्हारे
तो वह काम ही तुच्छ है जो तुमने किया है।
तुमने किसी गद्दार के कूल्हे पर वार नहीं किया है,
तुमने झूठी क़समें खाने वाले होंठ से प्याला नहीं छीना है,
तुमने कभी किसी ग़लती को ठीक नहीं किया है,
तुम कायर ही बने रहे लड़ाई में।
(चार्ल्स मैके, 747)²
बाल-श्रम :
गौरैये का बच्चा गौरैये को दाना नहीं चुगाता,
- रोजर एन. बाल्डविन : अमेरिकन सिविल लिबर्टी यूनियन के निदेशक रहे। फ्री स्पीच
फ़ाइट ऑफ़ द आई. डब्ल्यू. डब्ल्यू. (इण्डस्ट्रियल वर्कर्स ऑफ़ द वर्ल्ड) से - चार्ल्स मैके (1814-1889) : स्कॉट कवि, पत्रकार और गीतकार
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