भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 593, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंचूज़ा मुर्ग़ी को चुग्गा नहीं कराता,
बिल्ली का बच्चा बिल्ली के लिए चूहे नहीं मारता –
यह महानता तो सिर्फ़ मनुष्य को नसीब है।
हम सबसे बुद्धिमान, सबसे बलवान नस्ल हैं –
हम क़ाबिले तारीफ़ हैं।
एकमात्र ज़िन्दा प्राणी
जो जीता है अपने बच्चों की मेहनत पर।
(शार्लोट पर्किन्स गिलमैन)¹
पृष्ठ 34 (31)
कोई वर्ग नहीं! कोई समझौता नहीं!!
(जॉर्ज डी. हेरसन)
समाजवादी आन्दोलन के दौरान एक ऐसा वक़्त आ रहा है, और सम्भव है,
वह वक़्त आ चुका है, जब सुधरी हुई दशाएँ या समायोजित उजरतें मज़दूरों की माँग
का जवाब नहीं रह जायेंगी, और तब ये चीज़ें सामान्य बुद्धि के लिए एक अपमान
के अलावा और कुछ नहीं सिद्ध होंगी। आज दुनियाभर में जो समाजवादी आन्दोलन
चल रहा है वह बेहतर उजरतों, सुधरी हुई पूँजीवादी दशाओं या पूँजीवादी मुनाफ़े
में हिस्सा बँटाने के लिए नहीं चल रहा है; यह चल रहा है उजरतों और मुनाफ़ों
के ख़ात्मे के लिए, और पूँजीवाद एवं निजी पूँजीपतियों की समाप्ति के लिए। सुधरी
हुई राजनीतिक संस्थाएँ, पूँजी और श्रम के बीच समझौता कराने वाली परिषदें,
परोपकार और विशेषाधिकार जो पूँजीपतियों की ख़ैरातों के अलावा और कुछ नहीं
हैं – इनमें से कोई भी चीज़ उस सवाल का जवाब नहीं दे सकती जो मन्दिरों,
सत्ता के सिंहासनों और संसदों को कँपकँपा रहा है। जो लोग दबे-कुचले हैं और
जो लोग उनकी पीठ पर सवार होकर आगे बढ़े हुए हैं, अब इन दोनों के बीच कोई
अमन-चैन नहीं रह सकता। अब वर्गों के बीच कोई मेल-मिलाप नहीं हो सकता;
अब तो वर्गों का सिर्फ़ अन्त ही हो सकता है। जब तक पहले न्याय न हो, तब
तक सद्भावना की बात करना अनर्गल प्रलाप है, और जब तक इस दुनिया का
निर्माण करने वालों का अपनी मेहनत पर अधिकार न हो, तब तक न्याय की बात
करना बेकार है। दुनिया के मज़दूरों की माँग का जवाब उनकी मेहनत की समूची
कमाई के अलावा और कुछ नहीं हो सकता। (जॉर्ज डी. हेरसन)²
- शार्लोट पर्किन्स गिलमैन (1860-1935) : अमेरिकी उपन्यासकार, कहानीकार और
समाज सुधारक की कविता जिसे 1920 के दशक में अमेरिका में बालश्रम क़ानून में संशोधन
पर चली बहस में एक सांसद द्वारा उद्धृत किया गया। - सम्भवतः जॉर्ज डेविस हैरोन (1862-1925), जो एक ज़माने में क्रिश्चियन सोशलिस्ट
पादरी थे और अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य भी रहे।
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 587