भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 582, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंके लिए उकसाया? वे और हज़ारों लोग जो उनके साथ उठ खड़े हुए, बुरे आदमी
नहीं थे, भ्रष्ट नहीं थे, ख़ून के प्यासे नहीं थे, संगदिल नहीं थे, अपराधी नहीं थे,
और न ही स्वार्थी या पागल थे। तब वह क्या चीज़ थी जिसने इतने तीखे और गहरे
प्रतिवाद को उकसावा दिया...?
किसी ने भी इस सरल-सीधी बात पर गौर नहीं किया कि मनुष्य अपनेआप
को किसी विरोध के लिए बिना इस विश्वास के एकजुट नहीं करते कि कोई न
कोई चीज़ ऐसी है जिसका उन्हें विरोध करना है और कि किसी भी संगठित समाज
में व्यापक विरोध एक ऐसी चीज़ है जो गहरी छानबीन की दरकार रखती है।
– चार्ल्स एडवर्ड रसेल¹ (333)
<u>पृष्ठ 24 (21)</u>
क्रान्तिकारी की वसीयत
“मैं अपने दोस्तों से यह भी कहना चाहूँगा कि वे मेरे बारे में कम से कम चर्चा
करेंगे या बिल्कुल ही चर्चा नहीं करेंगे, क्योंकि जब आदमी की तारीफ़ होने लगती
है तो उसे इन्सान के बजाय देवप्रतिमा-सा बना दिया जाता है और यह मानवजाति
के भविष्य के लिए बहुत बुरी बात है...। सिर्फ़ कर्मों पर ही गौर करना चाहिए, उन्हीं
की तारीफ़ या निन्दा होनी चाहिए, चाहे वे किसी के द्वारा किये गये हों। अगर लोगों
को इनसे सार्वजनिक हित के लिए प्रेरणा मिलती दिखायी दे, तो वे इनकी तारीफ़
कर सकते हैं, लेकिन अगर ये सामान्य हित के लिए हानिकर लगें, तो वे इनकी
निन्दा भी कर सकते हैं, ताकि फिर इनकी पुनरावृत्ति न हो सके।
“मैं चाहूँगा कि किसी भी अवसर पर, मेरी क़ब्र के निकट या दूर, किसी भी
क़िस्म के राजनीतिक या धार्मिक प्रदर्शन न किये जायें, क्योंकि मैं समझता हूँ कि
मरे हुए के लिए ख़र्च किये जाने वाले समय का बेहतर इस्तेमाल उन लोगों की
जीवन-दशाओं को सुधारने में किया जा सकता है, जिनमें से बहुतों को इसकी
भारी आवश्यकता है।”
– फ़्रांसिस्को फेरेर² की वसीयत
स्पेनी शिक्षक (1859-1909), जिसे धर्म-पुरोहितों द्वारा बार्सिलोना दंगों के
बाद दुश्मनीवश एक षड्यन्त्र के तहत फाँसी दे दी गयी।
- चार्ल्स ई. रसेल (1860-1941) : मकरेकर्स नाम से प्रसिद्ध अमेरिकी लेखकों, पत्रकारों
के समूह के प्रमुख सदस्य थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं में पूँजीवादी व्यवस्था की बुराइयों का
भण्डाफोड़ किया। - पूरा नाम फ्रांसिस्को फेरेर गुआर्दिया (1859-1909) : स्पेनी शिक्षाशास्त्री, जो बाद में
समाजवादी बन गये; यद्यपि उन्होंने हिंसा का विरोध किया था, फिर भी उन पर मुक़दमा चलाया
गया, और फाँसी दे दी गयी, जिसे बाद में चलकर “अदालती हत्या” नाम दिया गया।
576 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़