भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 578, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंयदि तुमको अहसास नहीं जब
बेड़ी पीड़ा देती एक भाई को,
तो क्या सचमुच तुम नहीं अधम दास
जो क़ाबिल नहीं मुक्त होने के?
क्या है वह सच्ची मुक्ति, जो तोड़े
ज़ंजीरें बस अपनी ख़ातिर,
और भुला दे संगदिल होकर
कि मानवता का क़र्ज़ है हम पर?
नहीं, सच्ची मुक्ति तभी जब हम बाँटें
सब ज़ंजीरें, जो पहने हैं अपने भाई,
और भाव औ' कर्म से लगकर
हाँ औरों की मुक्ति में तत्पर!
दास तो वे जो भय खाते हैं स्वर देने में
गिरे हुए और दुर्बल की ख़ातिर;
दास तो वे जो नहीं चुनेंगे
घृणा, डाँट और गाली
और दुबककर मुँह मोड़ेंगे
सच से, इस पर सोच ज़रूरी;
दास तो वे जो हिम्मत न करें
दो या तीन भी हों गर सच के हक़ में।
– “जेम्स रसेल लॉवेल” (पृष्ठ 189)¹
पृष्ठ 20 (17)
भरे पड़े हैं शुभ्र और निर्मल आभा के रत्न घनेरे
सागर के गहन अगाध गह्वर में,
खिलते हैं बहुतेरे फूल अनदेखे लज्जारुण होते,
और लुटा देते अपनी सुगन्ध निर्जन बयार में।²
—o—
आविष्कार : अब तक यह सवाल क़ायम है कि क्या अब तक किये
गये सारे के सारे आविष्कार किसी भी आदमी की रोज़मर्रा की
कड़ी मशक़्क़त भरी ज़िन्दगी को आसान बना पाये हैं।
– जे.एस. मिल³, 199
- अमेरिकी कवि, निबन्धकार और सम्पादक (1819–91)
- अंग्रेज़ कवि टॉमस ग्रे (1716–7) की रचना एलिजी रिटेन इन एक कण्ट्री चर्चयार्ड से
- जॉन स्टुअर्ट मिल, अंग्रेज़ निबन्धकार और उदारवादी दार्शनिक (1808–73)
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