भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 577, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकर दिया। हम उस वक़्त तिरस्कृत हुए, जब हम सबसे अधिक उपयोगी थे, हमें
उस वक़्त दुत्कार दिया गया, जब हमारी ज़रूरत नहीं थी, और हमें उस वक़्त भुला
दिया गया, जब हमारे ऊपर विपत्तियों का पहाड़ टूटा हुआ था। हमें बीहड़-बंजर
साफ़ करने के लिए, उसकी सारी आदिम भयंकरताओं को दूर करने के लिए, तथा
उसके विश्व-पुरातन अवरोधों को छिन्न-भिन्न कर डालने के लिए भेज दिया
जाता। हम जहाँ भी काम करते, वहाँ एक दिन एक नया शहर जन्म ले लेता; और
जब यह जन्म ले ही रहा होता, तब यदि हममें से कोई वहाँ चला जाता, तो उसे
‘बिना निश्चित पते का आदमी’ कहकर पकड़ लिया जाता और सिरफिरा-आवारा
कहकर उस पर मुक़दमा चलाया जाता।”
– (पैट्रिक मैकगिल की कृति,
चिल्ड्रेन ऑफ़ द डेड एण्ड, सी.जे. 48 से)¹
नैतिकता : “नैतिकता और धर्म उस व्यक्ति के लिए महज शब्दभर
हैं जो आजीविका का जुगाड़ करने के लिए गन्दे नाले में मछली
मारता है, और जाड़े की रात में कड़ाके की शीतलहरी से बचने के लिए सड़कों
पर पीपों के पीछे पनाह लेता है।”
– होरेस ग्रीले (128)²
भूख : “शासक के लिए उचित यही है कि उसके शासन में कोई भी आदमी
ठण्ड और भूख से पीड़ित न रहे। आदमी के पास जब जीने के मामूली
साधन भी नहीं रहते, तो वह अपने नैतिक स्तर को बनाये नहीं रख सकता।”
– कोंको होशी
(जापान का बौद्ध भिक्षु, 14वीं सदी, पृष्ठ 135)
पृष्ठ 19 (16)
मुक्ति
अरे मनुष्यो! करते हो गर्वोक्ति
कि तुम सन्तति हो मुक्त और वीर पितरों की,
पर यदि लेता साँस एक भी दास धरा पर,
तो क्या सचमुच तुम हो मुक्त और वीर?
- पैट्रिक मैकगिल (1889-1963) : आइरिश पत्रकार, कवि और उपन्यासकार। (सी.जे.
– क्राइ फ़ॉर जस्टिस का संक्षिप्त) - अमेरिकी पत्रकार और राजनीतिज्ञ (1811-1872)
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 571