भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
DevanagariHindipublished788 पृष्ठ
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- पेड़ों पर रहना। 2. भोजन था फल, गिरीफल और कन्दमूल। 3. सुसंगत बोली
का विकास इस काल की प्रधान उपलब्धि। - मध्य अवस्था : 1. आग की खोज। 2. मछली भोजन के रूप में प्रयुक्त।
- शिकार के लिए पत्थर के औज़ार आविष्कृत। 4. मानव मांसभक्षण अस्तित्व में
आ जाता है।¹ - उच्चतर अवस्था : 1. धनुष और बाण, कुम्हारी नहीं। 2. ग्रामीण बस्तियाँ।
- घर बनाने में इमारती लकड़ी का इस्तेमाल। 4. कपड़े बुने जाने लगे।
असभ्यता की अवस्था में धनुष और बाण वैसे ही थे, जैसे बर्बरता की अवस्था
में लोहे की तलवार, और सभ्यता की अवस्था में आग्नेयास्त्र – यानी, प्रभुत्व के
हथियार।
पृष्ठ १ (5) - बर्बरता :
- निम्नतर अवस्था : 1. कुम्हारी का आरम्भ। पहले लकड़ी के बरतनों पर
मिट्टी की परतें चढ़ायी जाती थीं, लेकिन बाद में चलकर मिट्टी के बरतन
आविष्कृत कर लिये गये। - मानवजातियाँ दो स्पष्ट वर्गों में विभाजित :
(i) पूर्वी, जो जानवर पालती थीं और अनाज पैदा करती थीं;
(ii) पश्चिमी, जिनके पास सिर्फ़ 'मक्का' था। - मध्य अवस्था :
(अ) पश्चिमी गोलार्द्ध : अर्थात अमेरिका में वे खाद्य-फ़सलें उगाते थे, (खेती
और सिंचाई), और घर बनाने के लिए ईंटें पकाते थे।
(ब) पूर्वी : वे दूध और मांस के लिए पशुपालन करती थीं। इस अवस्था में
कोई खेती नहीं। - उच्चतर अवस्था :
- कच्चे लोहे को गलाना।
- दस्तावेज़ लिखने के लिए अक्षर-लिपि का विकास और उसका इस्तेमाल।
इस अवस्था में अनेक आविष्कार होते हैं। यूनानी नायकों का यही काल है। - बड़े पैमाने पर मक्का की खेती करने के लिए पशुओं द्वारा लोहे के हल
खींचे जाते हैं। - जंगलों की कटाई, तथा लोहे की कुल्हाड़ियाँ एवं लोहे की कुदालें इस्तेमाल
में आने लगीं। - यहाँ भगतसिंह ने हाशिये पर लिखा है : वेनिज़न = शिकार से प्राप्त पशु-मांस
562 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़