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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 559, कुल 788 में से

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पृष्ठ 559

परियोजना के सम्पादन की ज़िम्मेदारी दी गयी और 'हिन्दोस्तानी मंच' के महासचिव
सरदार ओबेराय, प्रो. आर.पी. भटनागर और डॉ. आर.सी. भारतीय ने उनके
सहयोगी की भूमिका निभायी। दुर्भाग्यवश, अर्थाभाव के कारण यह योजना खटाई
में पड़ गयी।
इसी दौरान डॉ. आर.सी. भारतीय को उक्त जेल नोटबुक की एक और टाइप
की हुई प्रतिलिपि प्राप्त हुई जो एक स्थानीय विद्वान डॉ. प्रकाश चतुर्वेदी मास्को
अभिलेखागार से फ़ोटो-प्रतिलिपि कराकर लाये थे। 'मास्को प्रति' और 'गुरुकुल
प्रति' शब्दशः एक-दूसरे से मिल रहे थे।
1991 में भूपेन्द्र हूजा ने नोटबुक को किश्तों में अपनी पत्रिका 'इण्डियन बुक
क्रॉनिकल' में प्रकाशित करना शुरू किया। भगतसिंह की जेल नोटबुक इस रूप
में पहली बार व्यापक पाठक समुदाय तक पहुँची। डॉ. चमनलाल ने भी भूपेन्द्र हूजा
को सूचित किया कि उक्त नोटबुक की एक प्रतिलिपि उन्होंने भी नेहरू म्यूजियम
लायब्रेरी, नई दिल्ली में देखी थी।
इस तरह भूपेन्द्र हूजा व उनके सहयोगियों की नज़र में उक्त जेल नोटबुक की
आधिकारिकता और अधिक पुष्ट हुई। पहली बार 1994 में उक्त जेल नोटबुक
'इण्डियन बुक क्रॉनिकल' की ओर से ही भूपेन्द्र हूजा और जी.बी. कुमार हूजा
(बलभद्र भारती) की भूमिकाओं के साथ पुस्तकाकार प्रकाशित हुई। उक्त दोनों
भूमिकाओं से भी स्पष्ट है कि जी.बी.कुमार हूजा और भूपेन्द्र हूजा को इस तथ्य
की जानकारी नहीं थी कि उक्त डायरी की मूल प्रति भगतसिंह के भाई कुलबीर
सिंह के पास फ़रीदाबाद में भी मौजूद है। उन्हें जी. देवल के उस लेख की भी
सम्भवतः जानकारी नहीं थी जिन्होंने सबसे पहले 1968 में यह तथ्य उद्घाटित
किया था, न ही उन्हें मित्रोखिन का वह लेख (1981) ही मिला था जो उक्त
डायरी के विशद अध्ययन के बाद लिखा गया था।
बहरहाल, मित्रोखिन ने कुलबीर सिंह के पास उपलब्ध नोटबुक/डायरी से लिये
गये हवालों पर जो पृष्ठ अंकित किये हैं, उन्हें देखने से स्पष्ट हो जाता है कि जी.
बी. कुमार हूजा को प्राप्त 'गुरुकुल टेक्स्ट' उक्त मूल डायरी की ही
डुप्लीकेट/हस्तलिखित प्रतिलिपि है।
ऐसा सम्भव है कि डॉ. प्रकाश चतुर्वेदी ने डायरी/नोटबुक की जो प्रतिलिपि
मास्को अभिलेखागार में देखी थी, वह मित्रोखिन ही भारत से ले गये हों। या यह
भी हो सकता है कि किसी और रूसी विद्वान ने भी डायरी का अध्ययन किया
हो।
बहरहाल, इन तथ्यों से डायरी की आधिकारिकता ही और अधिक पुष्ट होती
है।
'भगतसिंह और उनके साथियों के दस्तावेज' पुस्तक के सम्पादक-द्वय
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 553