भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 558, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्ययन करके एक लेख लिखा था, जो 1981 में अंग्रेज़ी में प्रकाशित उनकी
पुस्तक 'Lenin and India' में एक अध्याय के रूप में शामिल किया गया। पुनः
1990 में इस पुस्तक का हिन्दी अनुवाद भी प्रगति प्रकाशन, मास्को से 'लेनिन
और भारत' नाम से प्रकाशित हुआ।
अब तक इस डायरी के सम्बन्ध में प्राप्त जानकारी को हम यहाँ सिलसिलेवार
प्रस्तुत कर रहे हैं।
1968 में भारतीय इतिहासकार जी. देवल ने 'पीपुल्स पाथ' पत्रिका में
भगतसिंह पर एक लेख लिखा था जिसमें 200 पन्नों की एक कापी का ज़िक्र
किया गया है। उक्त कापी में पूँजीवाद, समाजवाद, राज्य की उत्पत्ति, मार्क्सवाद,
कम्युनिज़्म, धर्म, दर्शन, क्रान्तियों के इतिहास आदि पर विभिन्न पुस्तकों के
अध्ययन के दौरान भगतसिंह द्वारा जेल में लिये गये नोट्स हैं। यह नोटबुक भगतसिंह
की फाँसी के बाद उनके परिवार वालों को सौंप दी गयी थी। देवल ने इसे
फ़रीदाबाद में रह रहे भगतसिंह के छोटे भाई कुलबीर सिंह के पास देखा था और
अध्ययन करके नोट्स लिये थे। अपने लेख में देवल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि
यह डायरी प्रकाशित की जानी चाहिए, पर ऐसा हुआ नहीं।
उक्त डायरी की जानकारी होने पर 1977 में रूसी विद्वान मित्रोखिन भारत
आये और कुलबीर सिंह के हवाले से उक्त डायरी के विस्तृत अध्ययन के बाद
एक लेख लिखा जो उनकी पुस्तक 'Lenin and India' का एक अध्याय बना।
हमें उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 1979 के बाद इतिहास के कई शोधार्थियों
ने 404 पृष्ठों की उक्त जेल नोटबुक की एक फ़ोटो प्रतिलिपि तीन मूर्ति भवन
स्थित जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम व लायब्रेरी में भी देखी-पढ़ी। पर
इस पर अलग से कोई शोध निबन्ध कहीं भी प्रकाशित नहीं हुआ।
गुरुकुल कांगड़ी के तत्कालीन कुलपति जी.बी. कुमार हूजा 1981 में गुरुकुल
इन्द्रप्रस्थ (दिल्ली से 20 किलोमीटर दक्षिण तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन के निकट)
के दौरे पर गये थे। वहाँ संस्था के तत्कालीन मुख्य अधिष्ठाता स्वामी शक्तिवेश
ने गुरुकुल के 'हॉल ऑफ़ फ़ेम' के तहख़ाने में सुरक्षित इस ऐतिहासिक धरोहर की
एक हस्तलिखित/डुप्लीकेटेड प्रतिलिपि दिखलायी, जिसे जी.बी. कुमार हूजा ने
कुछ दिनों के लिए माँग लिया। बाद में स्वामी शक्तिवेश की हत्या हो गयी और
उक्त डायरी (प्रतिलिपि) हूजा जी के पास ही रह गयी।
1989 में भगतसिंह की शहादत के दिन 23 मार्च को जयपुर में कुछ
बुद्धिजीवियों ने 'हिन्दोस्तानी मंच' का गठन किया। उसी की प्रारम्भिक बैठकों
में जी.बी. कुमार हूजा ने भगतसिंह की जेल डायरी की जानकारी दी और
'हिन्दोस्तानी मंच' ने इसे प्रकाशित करने का निश्चय किया।
'इण्डियन बुक क्रॉनिकल' पत्रिका (जयपुर) के सम्पादक भूपेन्द्र हूजा को इस
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