भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 539, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंक़ौम पर मुफ़्त का रौब दाब डालकर गिरावट पैदा करेंगे। अभी सयाने सज्जन
समझते हैं कि यह उन्नति की राह नहीं है, लेकिन वह बेचारे यह नहीं समझते कि
यह लहरें कहाँ उठती हैं और किस तरह बढ़ती हैं? लेकिन सारा ताना-बाना समझ
में आ सकता है, यदि वे इतना ही समझ लें कि यह सबकुछ मध्यम दर्जे के लोगों
का ही निचोड़ है और किसानों और मज़दूरों को इससे कोई लाभ नहीं।
इस तरह हम देखते हैं कि इन लहरों की क़ामयाबी से मध्यम दर्जे के लोगों
को ही लाभ पहुँचता है। उन्होंने कभी बेगार, प्लेग आदि मर्जों के विरुद्ध बन्दोबस्त
करने की कोशिश नहीं की। न कभी लगान, नमक-टैक्स, आबियाना कम
करवाने या लोगों की शिक्षा का ठीक प्रबन्ध किया है, हालाँकि यही ज़रूरी
सवाल हैं जिनके हल हो जाने से जनता को लाभ हो सकता है। बेचारे मज़दूर या
किसान को सिविल सर्विस या पंजाब कौंसिल से क्या लाभ है? वह इज़्ज़त नहीं
चाहता, पदवी नहीं चाहता। हाँ, वह रोटी, आरोग्यता और आज़ादी ज़रूर चाहता है।
लेकिन इस तरफ़ तो कांग्रेस ने कभी ध्यान ही नहीं दिया। हाँ, कई सारे ज़रूरी
प्रस्ताव पास कर दिये। लेकिन इनसे क्या हो सकता है? गवर्नमेण्ट अच्छी तरह
समझती है कि इन मध्यम दर्जे के लोगों की वर्ग-रुचि क्या है? वह अच्छी तरह
जानती है कि यह कुछ मामूली-सा सुधार चाहते हैं, जिसके साथ इनकी जमात
को लाभ होने की आशा हो। इनको इससे कोई वास्ता नहीं कि गाँवों में रहने
वालों पर किस तरह की गुज़रती है? इसी कारण गवर्नमेण्ट इन लोगों को कौंसिल
और सिविल सर्विस आदि में कुछ पद देकर जनता के आन्दोलन रोकने के यत्न
किया करती है। इस तरह बड़े-बड़े नेकदिल सच्चे सेवकों की मेहनतें भी मध्यम
दर्जे के लोगों के लिए सोना साबित होती हैं, जबकि मज़दूरों और किसानों को
थोड़ा भी लाभ नहीं पहुँचता।
इस बात को अच्छी तरह समझने के लिए मैं कहूँगा कि खेत-मज़दूरों के हक़ों
पर ध्यान दिया जाये। ऐसा करने पर मालूम पड़ जायेगा कि सारे राजनीतिक दल
ज़मींदारों की ओर से ज़मींदारों के हक़ के लिए तो ज़रूर आन्दोलन करते हैं लेकिन
खेत-मज़दूरों के हक़ों के लिए आवाज़ उठाने की कभी हिम्मत नहीं करते, हालाँकि
हमारे देश में बहुसंख्यक खेत-मज़दूर ज़मींदारों के जुल्मों, टैक्सों और लगान के नीचे
पीसे जा रहे हैं।
वह आन्दोलन जो अपने कार्यक्रम में इस बात को सबसे पहले सामने नहीं
रखते और इसके लिए आन्दोलन नहीं करते, वह आम जनता के आन्दोलन नहीं
कहला सकते। इसलिए हम कांग्रेस को गुनहगार नहीं ठहरा सकते, क्योंकि वह
अपने सदस्यों के अलावा दूसरे लोगों की ओर अधिक ध्यान नहीं दे सकती। जूती
पहनने वाला ही अच्छी तरह समझ सकता है कि पैर में कील किस तरह चुभती
है। यह बात किसान ही अच्छी तरह अनुभव कर सकता है कि लगान आदि से
परिशिष्ट / 533