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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 519, कुल 788 में से

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पृष्ठ 519

के युवाओं की कल्पनाशीलता आकृष्ट करने में विफल रहे हैं – ये वे युवा हैं जो
दिलेरी दिखा सकते थे और जो अभी भी आपकी इच्छाओं के ख़िलाफ़ जाने की
दिलेरी दिखा रहे हैं। हालाँकि वे बेहिचक इस बात को स्वीकार करते हैं कि आप
आधुनिक युग की महानतम शख़्सियतों में से एक हैं। ये भारतीय क्रान्तिकारी हैं।
उन्होंने अब और अधिक ख़ामोश नहीं रहने का फ़ैसला किया है, अतएव वे आपसे
राजनीति के क्षेत्र से अवकाश लेने का अनुरोध करते हैं, अथवा राजनीतिक
आन्दोलन को इस प्रकार से निर्देशित करें जिससे कि क्रान्तिकारी आन्दोलन को
उससे मदद हासिल हो न कि उसके मार्ग में रुकावट पैदा हो। अभी तक उन लोगों
ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आपके अनुरोध को स्वीकार करते हुए अपनी गतिविधियों
को स्थगित रखा है पर अब वे आगे बढ़ चुके हैं। वास्तव में उन लोगों ने अपनी
ओर से आपको अपने कार्यक्रम को अमल में लाने में भरसक सहायता प्रदान की
है। लेकिन अब प्रयोग ख़त्म हो चुका है, लिहाज़ा क्रान्तिकारी लोग अपने वादे से
आज़ाद हैं। वस्तुतः उन्होंने केवल सालभर के लिए चुप रहने का वादा किया था,
इससे अधिक समय के लिए नहीं।
आगे, मैं इस बात का उल्लेख करना चाहूँगा कि जब आपने 39वीं कांग्रेस में
अपने हालिया अध्यक्षीय सम्बोधन में क्रान्तिकारियों पर दोषारोपण किया था तो
आपने कई पहलुओं से उनका ग़लत मूल्यांकन किया था। आपने कहा कि
क्रान्तिकारी भारत की प्रगति में बाधा डाल रहे हैं। मुझे नहीं पता कि ‘प्रगति’ शब्द
से आपका मतलब क्या है। अगर आपका मतलब राजनीतिक प्रगति से है तो क्या
आप इससे इन्कार कर सकते हैं कि भारत द्वारा पहले ही हासिल की जा चुकी
प्रत्येक राजनीतिक प्रगति, फिर वह चाहे मामूली ही क्यों न हो, मुख्यतया
क्रान्तिकारी पार्टी की क़ुर्बानियों एवं प्रयत्नों के द्वारा हासिल हुई है? क्या आपको
इससे इन्कार है कि बंगाल का विभाजन बंगाल के क्रान्तिकारियों के प्रयासों से रद्द
हुआ? क्या आपको इस बात में सन्देह है कि मोर्ले-मिण्टो सुधार भारतीय
क्रान्तिकारी आन्दोलन का फल है, जैसाकि मोण्टफ़ोर्ड सुधार को अमल में लाने
में अगर पूरी तरह नहीं तो मुख्य भूमिका अवश्य थी? अगर आप इन प्रश्नों का
सकारात्मक उत्तर देते हैं तो मुझे बहुत अधिक हैरानी नहीं होगी लेकिन मैं आपको
यक़ीन दिला सकता हूँ कि ब्रिटिश सरकार को इस आन्दोलन के सम्भावनासम्पन्न
होने का अहसास है। यहाँ तक कि स्वर्गीय मोंशेग्यू ने एक जाने-माने भारतीय से
यह बात कही थी कि महज युवा भारतीय क्रान्तिकारियों की गतिविधियों के चलते
ही उन्होंने भारत आने की जहमत उठाई और अपने प्राणों को जोखिम में डाला।
अगर आप यह कहते हैं कि ये सुधार सच्ची प्रगति के सूचक नहीं हैं तो मैं
यह कहना चाहूँगा कि इस क्रान्तिकारी आन्दोलन ने भारत की नैतिक उन्नति में कोई
कम प्रगति नहीं हासिल की है। भारतीय मौत को लेकर दयनीय रूप से भयभीत
परिशिष्ट / 513