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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 500, कुल 788 में से

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पृष्ठ 500

अधिक से अधिक सक्रिय मज़दूर-किसान और छोटे दस्तकार राजनीतिक कार्यकर्ता
जुड़ते रहेंगे। लेकिन मुख्य तौर पर यह क्रान्तिकारी बुद्धिजीवियों, स्त्रियों व पुरुषों की
पार्टी होगी, जिनकी मुख्य ज़िम्मेदारी यह होगी कि वे योजना बनायें, फिर उसे लागू
करें, प्रोपेगेण्डा या प्रचार करें, अलग-अलग यूनियनों में काम शुरू कर उनमें
एकजुटता लायें, उनके एकजुट हमले की योजना बनायें, सेना व पुलिस को
क्रान्ति-समर्थक बनायें और उनकी सहायता या अपनी अन्य शक्तियों से विद्रोह या
आक्रमण की शक्ल में क्रान्तिकारी टकराव की स्थिति बनायें, लोगों को विद्रोह के
लिए प्रयत्नशील करें और समय पड़ने पर निर्भीकता से नेतृत्व दे सकें।
वास्तव में वही आन्दोलन का दिमाग़ हैं। इसीलिए उन्हें दृढ़ चरित्र की ज़रूरत
होगी, यानी पहलक़दमी और क्रान्तिकारी नेतृत्व की क्षमता। उनकी समझ
राजनीतिक, आर्थिक और ऐतिहासिक समस्याओं, सामाजिक रुझानों, प्रगतिशील
विज्ञान, युद्ध के नये वैज्ञानिक तरीक़ों और उसकी कला आदि के अनुशासित भाव
से किये गये गहरे अध्ययन पर आधारित होनी चाहिए। क्रान्ति परिश्रमी विचारकों
और परिश्रमी कार्यकर्ताओं की पैदावार होती है। दुर्भाग्य से भारतीय क्रान्ति का
बौद्धिक पक्ष हमेशा दुर्बल रहा है, इसीलिए क्रान्ति की अत्यावश्यक चीज़ों और
किये कामों के प्रभाव पर ध्यान नहीं दिया जाता रहा। इसलिए एक क्रान्तिकारी को
अध्ययन-मनन अपनी पवित्र ज़िम्मेदारी बना लेना चाहिए।
यह तो स्पष्ट है कि पार्टी कुछ विशेष मामलों में खुले रूप में काम कर सकती
है। जहाँ तक सम्भव हो, पार्टी को गुप्त नहीं होना चाहिए। इसमें सन्देह नहीं रहेंगे
और पार्टी को शक्ति और प्रतिष्ठा मिलेगी। पार्टी को बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी उठानी
होगी, इसलिए सुविधा की दृष्टि से पार्टी को कुछ समितियों में बाँटा जा सकता
है जो प्रत्येक क्षेत्र के लिए विशेष कामों की देखभाल करेंगी। काम का यह विभाजन
समय की आवश्यकता के अनुसार लचीला होना चाहिए या सदस्य की सम्भावनाएँ
आँककर उसे किसी स्थानीय समिति में काम दिया जा सकता है। स्थानीय समिति,
प्रान्तीय बोर्ड के अधीन होगी व बोर्ड सुप्रीम कौंसिल के अधीन। प्रान्त के भीतर
सम्पर्क का काम प्रान्तीय बोर्ड के अधीन होगा। बिखरे-बिखरे सभी कामों या
बिखराने वाले तत्त्वों को रोकना चाहिए, लेकिन अधिक केन्द्रीयकरण की सम्भावना
नहीं है, इसलिए उसकी अभी कोशिश भी नहीं करनी चाहिए।
सभी स्थानीय समितियों को एक-दूसरे से सम्पर्क रखते हुए काम करने चाहिए
और समिति में एक सदस्य भी होना चाहिए। समिति छोटी, संयुक्त व कुशल हो
और इसे वाद-विवाद क्लब में पतित नहीं होने देना चाहिए।
इसलिए प्रत्येक क्षेत्र में क्रान्तिकारी पार्टी इस तरह हो –
(क) सामान्य समिति : भरती करना, सेना में प्रचार, सामान्य नीति, संगठन,
जन-संगठनों में सम्पर्क – (परिशिष्ट क)।
494 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़