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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 501, कुल 788 में से

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(ख) वित्त समिति : समिति में महिला सदस्यों की संख्या अधिक हो
सकती है। इस समिति के सिर पर सबसे मुश्किल कामों से भी मुश्किल काम
निर्भर है, इसलिए सभी को खुले दिल से इसकी सहायता करनी चाहिए। धन के
स्रोत प्राथमिकता के अनुसार हों – स्वैच्छिक चन्दा, जबरी चन्दा (सरकारी धन),
विदेशी पूँजीपति या बैंक, विदेश में रहने वालों की देशी व्यक्तिगत सम्पत्ति पर
क़ब्ज़ा या ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े, जैसे गबन। (अन्तिम दोनों हमारी नीति के विपरीत
हैं और पार्टी को हानि पहुँचाते हैं, इसलिए इन्हें अधिक बढ़ावा नहीं देना चाहिए।)
(ग) एक्शन कमेटी (कार्रवाई समिति) : इसका रूप – साबोताज,
हथियार-संग्रह और विद्रोह का प्रशिक्षण देने के लिए एक गुप्त समिति।
ग्रुप (क) – नवयुवक : शत्रु की ख़बरें एकत्र करना,
स्थानीय सैनिक-सर्वेक्षण।
ग्रुप (ख) – विशेषज्ञ : शस्त्र संग्रह, सैनिक-प्रशिक्षण आदि।
(घ) स्त्री-समिति : यद्यपि ज़ाहिरा तौर पर स्त्री-पुरुषों में कोई भेदभाव नहीं
रखा जाता तथापि पार्टी को सुरक्षा व सुविधा के लिए ऐसी समिति की ज़रूरत है
जो अपने सदस्यों की पूरी ज़िम्मेदारी ओढ़ सके। उन्हें वित्त समिति का पूरा भार
सौंपा जा सकता है और काफ़ी हद तक सामान्य समिति के काम भी दिये जा सकते
हैं। कार्रवाई समिति के लिए इनमें अधिक सम्भावना नहीं है। इनकी प्रारम्भिक
जिम्मेदारियाँ हैं – स्त्रियों को क्रान्तिकारी बनाना और इनमें से प्रत्यक्ष सेवा के लिए
सक्रिय सदस्य भरती करना।
ऊपर बताये गये कार्यक्रम से यह निष्कर्ष निकालना सम्भव है कि क्रान्ति या
आज़ादी के लिए कोई छोटा रास्ता नहीं है। 'यह किसी सुन्दरी की तरह सुबह-सुबह
हमें दिखायी नहीं देगी' और यदि ऐसा हुआ तो वह बड़ा मनहूस दिन होगा। बिना
किसी बुनियादी काम के, बग़ैर जुझारू जनता के और बिना किसी पार्टी के, अगर
(क्रान्ति) हर तरह से तैयार हो, तो यह एक असफलता होगी। इसीलिए हमें स्वयं
को झिंझोड़ना होगा। हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि पूँजीवादी व्यवस्था
चरमरा रही है और तबाही की ओर बढ़ रही है। दो या तीन साल में शायद इसका
विनाश हो जाये। यदि आज भी हमारी शक्ति बिखरी रही और क्रान्तिकारी शक्तियाँ
एकजुट होकर न बढ़ सकीं तो ऐसा संकट आयेगा कि हम उसे सँभालने के लिए
तैयार नहीं होंगे। आइये, हम यह चेतावनी स्वीकार करें और दो या तीन वर्ष में
क्रान्ति की ओर आगे बढ़ने की योजना बनायें।
(फ़रवरी, 1931)
विचारों की सान पर क्रान्ति की तलवार / 495