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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 498, कुल 788 में से

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पृष्ठ 498

चाहिए और बग़ावत के लिए खड़ा होना चाहिए। और क़ौम कांग्रेस के लाउडस्पीकर
नहीं है, वरन वे मज़दूर-किसान हैं, जो भारत की 95 प्रतिशत जनसंख्या है। राष्ट्र
स्वयं को राष्ट्रवाद के विश्वास पर ही हरकत में लायेगा, यानी साम्राज्यवाद और
पूँजीपति की गुलामी से मुक्ति के विश्वास दिलाने से।
हमें याद रखना चाहिए कि श्रमिक क्रान्ति के अतिरिक्त न किसी और क्रान्ति
की इच्छा करनी चाहिए और न ही वह सफल हो सकती है।
कार्यक्रम
क्रान्ति का स्पष्ट और ईमानदार कार्यक्रम होना समय की ज़रूरत है और इस
कार्यक्रम को लागू करने के लिए मज़बूत कार्रवाई होनी चाहिए।
1917 में अक्टूबर क्रान्ति से पूर्व, जब लेनिन अभी मास्को में भूमिगत थे तो
उन्होंने सफल क्रान्ति के लिए तीन ज़रूरी शर्तें बतायी थीं –

  1. राजनीतिक-आर्थिक परिस्थिति।
  2. जनता के मन में विद्रोह-भावना।
  3. एक क्रान्तिकारी पार्टी, जो पूरी तरह प्रशिक्षित हो और परीक्षा के समय
    जनता को नेतृत्व प्रदान कर सके।
    भारत में पहली शर्त पूरी हो चुकी है, दूसरी व तीसरी शर्त अन्तिम रूप में
    अपनी पूर्ति की प्रतीक्षा कर रही हैं। इसके लिए हरकत में आना आज़ादी के सभी
    सेवकों का पहला काम है और इसी मुद्दे को सामने रखकर कार्यक्रम बनाया जाना
    चाहिए। इसकी रूपरेखा नीचे दी जा रही है और उसके प्रत्येक अनुभाग-सम्बन्धी
    सुझाव अनुसूची ‘क’ व ‘ख’ में दर्ज हैं –
    बुनियादी काम
    कार्यकर्ताओं के सामने सबसे पहली ज़िम्मेदारी है जनता को जुझारू काम के लिए
    तैयार व लामबन्द करना। हमें अन्धविश्वासों, भावनाओं, धार्मिकता या तटस्थता के
    आदर्शों से खेलने की ज़रूरत नहीं है। हमें जनता से सिर्फ़ प्याज़ के साथ रोटी का
    वायदा ही नहीं करना। ये वायदे सम्पूर्ण व ठोस होंगे और इन पर हम ईमानदारी और
    स्पष्टता से बात करेंगे। हम कभी भी उनके मन में भ्रमों का जमघट नहीं बनने देंगे।
    क्रान्ति जनता के लिए होगी। कुछ स्पष्ट निर्देश ये होंगे –
  4. सामन्तवाद की समाप्ति।
  5. किसानों के कर्ज़े समाप्त करना।
  6. क्रान्तिकारी राज्य की ओर से भूमि का राष्ट्रीयकरण ताकि सुधरी हुई व
    साझी खेती स्थापित की जा सके।
  7. रहने के लिए आवास की गारण्टी।
    492 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़