भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 497, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंउस काम के प्रभाव को, लोगों पर उसके प्रभाव और दुश्मन की ताक़त को पहले
ही देखना चाहिए। ऐसे काम पार्टी और जनता का ध्यान जुझारू जनसंघर्ष से हटाकर
तेज़ भड़कीले कामों की ओर लगा सकते हैं और इस प्रकार पार्टी की जड़ों पर
प्रहार करने का बहाना बन सकते हैं। इस प्रकार किसी भी स्थिति में इस आदर्श
को आगे नहीं बढ़ाना है।
लेकिन गुप्त सैनिक विभाग कोई श्रापग्रस्त चीज़ नहीं है। वास्तव में यह तो
अग्रिम पंक्ति है। क्रान्तिकारी पार्टी की ‘गोलीमार पंक्ति’ ‘आधार’ से पूरी तरह जुड़ी
होनी चाहिए। ‘आधार’ जुझारू व गतिशील जन-पार्टी को बनना है। संगठन के लिए
धन और हथियार संग्रह करने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए।
क्रान्ति
क्रान्ति से हमारा क्या आशय है, यह स्पष्ट है। इस शताब्दी में इसका सिर्फ़ एक
ही अर्थ हो सकता है – जनता के लिए जनता का राजनीतिक शक्ति हासिल
करना। वास्तव में यही है ‘क्रान्ति’, बाक़ी सभी विद्रोह तो सिर्फ़ मालिकों के
परिवर्तन द्वारा पूँजीवादी सड़ाँध को ही आगे बढ़ाते हैं। किसी भी हद तक लोगों
से या उनके उद्देश्यों से जतायी हमदर्दी जनता से वास्तविकता नहीं छिपा सकती,
लोग छल को पहचानते हैं। भारत में हम भारतीय श्रमिक के शासन से कम कुछ
नहीं चाहते। भारतीय श्रमिकों को – भारत में साम्राज्यवादियों और उनके मददगार
हटाकर जोकि उसी आर्थिक व्यवस्था के पैरोकार हैं, जिसकी जड़ें शोषण पर
आधारित हैं – आगे आना है। हम गोरी बुराई की जगह काली बुराई को लाकर
कष्ट नहीं उठाना चाहते। बुराइयाँ, एक स्वार्थी समूह की तरह, एक-दूसरे का
स्थान लेने के लिए तैयार हैं।
साम्राज्यवादियों को गद्दी से उतारने के लिए भारत का एकमात्र हथियार श्रमिक
क्रान्ति है। कोई और चीज़ इस उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकती। सभी विचारों वाले
राष्ट्रवादी एक उद्देश्य पर सहमत हैं कि साम्राज्यवादियों से आज़ादी हासिल हो। पर
उन्हें यह समझने की भी ज़रूरत है कि उनके आन्दोलन की चालक शक्ति विद्रोही
जनता है और उसकी जुझारू कार्रवाइयों से ही सफलता हासिल होगी। चूँकि इसका
सरल समाधान नहीं हो सकता, इसलिए स्वयं को छलकर वे उस ओर लपकते हैं,
जिसे वे आरजी इलाज, लेकिन झटपट और प्रभावशाली मानते हैं – अर्थात चन्द
सैकड़े दृढ़ आदर्शवादी राष्ट्रवादियों के सशस्त्र विद्रोह के जरिये विदेशी शासन को
पलटकर राज्य का समाजवादी रास्ते पर पुनर्गठन। उन्हें समय की वास्तविकता में
झाँककर देखना चाहिए। हथियार बड़ी संख्या में प्राप्त नहीं हैं और जुझारू जनता
से अलग होकर अशिक्षित गुट की बग़ावत की सफलता का इस युग में कोई चांस
नहीं है। राष्ट्रवादियों की सफलता के लिए उनकी पूरी क़ौम को हरकत में आना
विचारों की सान पर क्रान्ति की तलवार / 491