भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 496, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंलागू नहीं होगा, यह चेतावनी मैं देना चाहता हूँ। आयरलैण्ड में इक्की-दुक्की
आतंकवादी कार्रवाइयाँ नहीं थीं, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर जनसाधारण की
बग़ावत थी, जिसमें बन्दूक़धारी अपनी नज़दीकी जानकारी और हमदर्दी से लोगों से
जुड़ा हुआ था। उन्हें बड़ी आसानी से हथियार मिल जाते थे, क्योंकि अमेरिकी
आयरिश उन्हें अथाह आर्थिक मदद दे रहे थे। भौगोलिक स्थिति भी ऐसे युद्ध के
लिए लाभदायक थी। लेकिन तो भी आयरलैण्ड को अपने आन्दोलन के अपूर्ण
उद्देश्यों के साथ ही सन्तोष करना पड़ा। इसने आयरिश जनता की गुलामी तो कम
की है, लेकिन आयरिश श्रमिक वर्ग को पूँजीपतियों के जंजाल से मुक्त नहीं
करवाया। भारत को आयरलैण्ड से सीखना है। यह एक चेतावनी भी है कि किस
प्रकार क्रान्तिकारी सामाजिक आधार से खाली राष्ट्रवादी आदर्शवाद, हालात के
साज़गार होने पर भी साम्राज्यवाद से समझौते की रेत में गुम हो सकता है। क्या भारत
को अभी भी आयरलैण्ड की नक़ल करनी चाहिए – यदि वह की भी जा सके,
तो भी?
एक प्रकार से गाँधीवाद अपना भाग्यवाद का विचार रखते हुए भी, क्रान्तिकारी
विचारों के कुछ नज़दीक पहुँचने का यत्न करता है, क्योंकि यह सामूहिक कार्रवाई
पर निर्भर करता है, यद्यपि यह कार्रवाई समूह के लिए नहीं होती। उन्होंने मज़दूरों
को आन्दोलन में भागीदार बनाकर उन्हें मज़दूर-क्रान्ति के रास्ते पर डाल दिया है।
यह बात अलग है कि उन्हें कितनी असभ्यता या स्वार्थ से अपने राजनीतिक
कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल किया गया है। क्रान्तिकारियों को 'अहिंसा के फ़रिश्ते'
को उसका योग्य स्थान देना चाहिए।
आतंकवाद के शैतान को दाद देने की ज़रूरत नहीं है। आतंकवादियों ने काफ़ी
काम कर लिया है, काफ़ी कुछ सिखा दिया है। यदि हम अपने उद्देश्यों और तरीक़ों
सम्बन्धी भूलें न करें तो यह अभी भी कुछ लाभप्रद हो सकता है। विशेषतः निराशा
के समय आतंकवादी तरीक़ा हमारे प्रचार-अभियान में सहायक हो सकता है,
लेकिन यह पटाखेबाज़ी के सिवाय है कुछ नहीं और इसे विशेष समय और कुछ
गिने-चुने लोगों के लिए सुरक्षित रखना चाहिए। क्रान्तिकारी को निरर्थक आतंकवादी
कार्रवाइयों और व्यक्तिगत आत्मबलिदान के दूषित चक्र में न डाला जाये। सभी के
लिए उत्साहवर्द्धक आदर्श, उद्देश्य के लिए मरना न होकर उद्देश्य के लिए जीना
– और वह भी लाभदायक तरीक़े से योग्य रूप में जीना – होना चाहिए।
यह कहने की तो कोई ज़रूरत नहीं है कि हम आतंकवाद से पूरी तरह सम्बन्ध
नहीं तोड़ रहे। हम श्रमिक क्रान्ति के दृष्टिकोण से इसका पूरे तौर पर मूल्यांकन
चाहते हैं। जो नवयुवक परिपक्व व चुपचाप (तरीक़े से) संगठन के काम में फिट
नहीं होते, उनकी दूसरी भूमिका हो सकती है। उन्हें नीरस कामों से मुक्त कर अपनी
इच्छा पूरी करने के लिए छोड़ देना चाहिए। लेकिन संचालक संस्था को पार्टी और
490 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़