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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 479, कुल 788 में से

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पृष्ठ 479

चिन्तन-पद्धति के लिए कोई स्थान नहीं है। फिर भी लेखक का यह रहस्यवाद
किसी भी तरह से हेय या खेदजनक नहीं है। इसका अपना सौन्दर्य और आकर्षण
है। उसके विचार उत्साहप्रद हैं, उदाहरण के लिए –
“नींव के पत्थर बनो, अनजाने-अज्ञात,
और अपने सीने पर बरदाश्त करो खुशी-खुशी
विशाल भारी-भरकम निर्माण का बोझ,
पा लो आश्रय कष्ट सहन में,
मत करो ईर्ष्या शीर्ष पर जड़े पत्थर से
जिस पर उड़ेली जाती है सारी लौकिक प्रशंसा,” आदि आदि।
("Be a foundation stone obscure,
And on thy breast cheerfully bear
The architecture vast and huge,
In suffering find true refuge.
Envy not the plastered top-stone,
On which all worldly praise is thrown", etc. etc.)
अपने निजी अनुभव के आधार पर मैं अधिकारपूर्वक कह सकता हूँ कि गुप्त
कार्यों के दौरान, जब मनुष्य ‘बिना किसी आशा और भय के’, लगातार
अपरिचित, असम्मानित, अप्रशंसित व्यक्ति की मौत मरने के लिए तैयार रहते हुए’
लगातार एक जोखिम भरी ज़िन्दगी बिताता है, तो वह व्यक्तिगत प्रलोभनों और
इच्छाओं से सिर्फ़ इस तरह के रहस्यवाद के सहारे ही लड़ सकता है और ऐसा
रहस्यवाद किसी भी तरह से पस्तहिम्मती पैदा करने वाला नहीं होता। असली
चीज़ जिसका उन्होंने वर्णन किया है वह एक क्रान्तिकारी की मानसिकता है।
लाला रामसरन दास जिस क्रान्तिकारी पार्टी के सदस्य थे, उसे कई हिंसात्मक
कार्यों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया था। लेकिन इससे किसी भी तरह यह
साबित नहीं होता कि क्रान्तिकारी ध्वंस में सुख अनुभव करने वाले खून के प्यासे
राक्षस होते हैं। पढ़िये –
“अगर ज़रूरत हो, तो उग्र बनो ऊपरी तौर पर
लेकिन हमेशा नरम रहो अपने दिल में
अगर ज़रूरत हो, तो फुँफकारो पर डसो मत
दिल में प्यार को ज़िन्दा रखो और लड़ते रहो ऊपरी तौर पर”।
("If need be, outwardly be wild,
But in thy heart be always mild
Hiss if need be, but do not bite
Love in thy heart and outside fight".)
निर्माण के लिए ध्वंस ज़रूरी ही नहीं, अनिवार्य है। क्रान्तिकारियों को इसे
विचारों की सान पर क्रान्ति की तलवार / 473