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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 476, कुल 788 में से

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पृष्ठ 476

‘ड्रीमलैण्ड’ की भूमिका
लाला रामसरन दास आज़ादी की लड़ाई के पुराने सिपाही थे। 1907 में जब
भगतसिंह का जन्म हुआ तब वह उनके चाचा अजीत सिंह के साथ जंगे-आज़ादी
में क़दम रख चुके थे। उम्रक़ैद काटकर बाहर आये तो क्रान्तिकारियों की मदद करने
लगे। लाहौर षड्यन्त्र केस में उन्हें फँसाया गया और फिर पाँच साल की क़ैद हुई।
जेल में ही वे अंग्रेज़ी में कविता लिखते थे। उनकी काव्य पुस्तक ‘द ड्रीमलैण्ड’ जब
तैयार हुई तो भगतसिंह से उन्होंने इसकी भूमिका लिखने का अनुरोध किया। भगतसिंह
ने इसे बड़े संकोच से स्वीकारा और लाहौर सेण्ट्रल जेल में ही 15 जनवरी, 1931
को भूमिका के तौर पर यह आलोचनात्मक लेख लिखा। यह उनकी साहित्यिक
समझ, गहन अन्तर्दृष्टि, गहरी संवेदना और आलोचनात्मक विवेक का एक श्रेष्ठ
उदाहरण है। — स.
मेरे श्रेष्ठ मित्र लाला रामसरन दास ने मुझसे अपनी काव्यकृति ‘द ड्रीमलैण्ड’ की
भूमिका लिखने के लिए कहा है। मैं न तो कवि हूँ, न साहित्यकार हूँ और न पत्रकार
या आलोचक ही हूँ, इसलिए उनकी इस माँग का औचित्य मैं किसी भी तरह से
नहीं समझ पा रहा हूँ। लेकिन जिन परिस्थितियों में मैं हूँ उनमें लेखक से इस बारे
में बहस-मुबाहसा कर पाना सम्भव नहीं है, इसलिए मेरे सामने मित्र की इच्छा पूरी
करने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं रह जाता।
चूँकि मैं कवि नहीं हूँ, इसलिए मैं उस दृष्टिकोण से इस पर बहस करने नहीं
जा रहा हूँ। मैं छन्दों-तुकों के ज्ञान से सर्वथा अनभिज्ञ हूँ और यह भी नहीं जानता
कि छन्दों के मानदण्डों पर यह खरी उतरेगी या नहीं। एक साहित्यकार नहीं होने
के नाते मैं राष्ट्रीय साहित्य में इसका उचित स्थान दिलाने के दृष्टिकोण से इस पर
बहस करने नहीं जा रहा हूँ।
एक राजनीतिक कार्यकर्ता होने के नाते अधिक से अधिक मैं इस पर उसी
दृष्टिकोण से बहस कर सकता हूँ। लेकिन यहाँ भी एक बात मेरे काम को
व्यावहारिक तौर पर असम्भव, या कम से कम बहुत कठिन बना देती है।
नियमानुसार भूमिका हमेशा वह आदमी लिखता है जो कृति की विषयवस्तु के बारे
में वही विचार रखता हो जो लेखक रखता है। लेकिन यहाँ मामला काफ़ी भिन्न
470 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़