भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 473, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंमैं पूछता हूँ, जब कोई आदमी पाप या अपराध करना चाहता है तो आपका
सर्वशक्तिमान ईश्वर उसे रोकता क्यों नहीं? उसके लिए तो यह बहुत ही आसान
काम होगा। उसने जंगबाज़ों को मारकर या उनके भीतर युद्धोन्माद को मारकर
मनुष्यता को विश्वयुद्ध की महाविपत्ति से क्यों नहीं बचाया? वह अंग्रेज़ों के मन में
कोई ऐसी भावना क्यों नहीं पैदा कर देता कि वे हिन्दुस्तान को आज़ाद कर दें?
वह तमाम पूँजीपतियों के दिलों में परोपकार का ऐसा जज़्बा क्यों नहीं भर देता कि
वे उत्पादन के साधनों पर अपने निजी स्वामित्व के अधिकार को त्याग दें और इस
प्रकार सारे मेहनतकश वर्ग को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज को पूँजीवाद
के बन्धन से मुक्त कर दें? आप समाजवाद के सिद्धान्त की व्यावहारिकता पर बहस
करना चाहते हैं। चलिये, मैं यह ज़िम्मेदारी आपके सर्वशक्तिमान पर ही डालता हूँ
कि वह उसे व्यावहारिक बना दे। लोग इतना तो मानते ही हैं कि आम जनता की
भलाई के लिए समाजवाद अच्छी चीज़ है। उसका विरोध करने के लिए उनके पास
एक ही बहाना है कि वह व्यावहारिक नहीं है। तो अपने सर्वशक्तिमान को बुलाइये
और उससे कहिए कि वह बाक़ायदा सारी दुनिया में समाजवाद क़ायम कर दे।
अब आप गोलमाल तर्क देना बन्द कीजिये, वे चलेंगे नहीं। मैं आपको बता
दूँ, अंग्रेज़ों का शासन यहाँ इसलिए नहीं है कि यह ईश्वर की इच्छा है, बल्कि
इसलिए है कि उनके पास ताक़त है और हम उनका विरोध नहीं करते। वे ईश्वर
की सहायता से नहीं, बल्कि तोपों, बन्दूकों, बमों और गोलियों, पुलिस और फ़ौज
तथा हमारी उदासीनता की सहायता से हमें गुलाम बनाये हुए हैं और एक राष्ट्र द्वारा
दूसरे राष्ट्र का निर्लज्ज शोषण करने का सबसे घृणित पाप समाज के विरुद्ध
सफलतापूर्वक करते चले जा रहे हैं। ईश्वर कहाँ है? वह क्या कर रहा है? क्या
वह मानवजाति के इन सब दुखों और तकलीफ़ों का मज़ा ले रहा है? तब तो वह
नीरो है, चंगेज़ख़ाँ है, उसका नाश हो!
क्या आप मुझसे यह जानना चाहते हैं कि यदि मैं ईश्वर को नहीं मानता तो
दुनिया और इन्सान को कहाँ से पैदा हुआ मानता हूँ? ठीक है, बताता हूँ। चार्ल्स
डार्विन ने इस विषय पर कुछ प्रकाश डालने की कोशिश की है। उसका अध्ययन
कीजिये। निर्लम्ब स्वामी की पुस्तक 'सहज ज्ञान' पढ़िए। इससे कुछ हद तक
आपके सवाल का जवाब मिल जायेगा। यह प्राकृतिक घटना है। विभिन्न पदार्थों के
आकस्मिक संयोग से उत्पन्न नीहारिका से पृथ्वी की उत्पत्ति हुई। कब? यह जानने
के लिए इतिहास देखिये। इसी प्रकार जीवधारी उत्पन्न हुए और उनमें से ही एक
लम्बे अरसे के बाद मनुष्य का विकास हुआ। डार्विन की पुस्तक 'जीवों की
उत्पत्ति' पढ़िए। और इसके बाद की तमाम प्रगति प्रकृति पर विजय प्राप्त करने के
लिए मनुष्य द्वारा उसके विरुद्ध किये गये अनवरत संघर्ष से हुई है। इस घटना की
यह संक्षिप्ततम व्याख्या है।
विचारों की सान पर क्रान्ति की तलवार / 467