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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 788 में से

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पृष्ठ 47

लाला हरदयाल 1911 में अमेरिका पहुँचे और वहाँ स्टैनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय
में प्राध्यापक हो गये। सैन फ्रांसिस्को में 'हिन्दुस्तानी स्टूडेण्ट्स एसोसिएशन' नाम
की एक संस्था उन्होंने गठित की। 1913 में एस्टोरिया की 'हिन्दुस्तानी एसोसिएशन'
का गठन हुआ। करीम बख़्श, नवाब ख़ान, बलवन्त सिंह, मुंशीराम, केसर सिंह और
कर्तार सिंह सराभा इसके सदस्य थे। ठाकुरदास और उनके मित्रों ने सेण्ट जॉन में
रहने वाले भारतीयों की एक संस्था गठित की। 1913 में शिकागो में 'हिन्दुस्तानी
एसोसिएशन ऑफ़ दि युनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका' का गठन हुआ।$^{13}$
लाला हरदयाल ने महसूस किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न हिस्सों
में कार्यरत इन संगठनों की गतिविधियों का समन्वय आवश्यक है। अतः उन्होंने
कनाडा और अमेरिका में रहने वाले भारतीय क्रान्तिकारियों की एक मीटिंग बुलायी।
इस मीटिंग में 'हिन्दुस्तानी एसोसिएशन ऑफ़ द पैसिफ़िक कोस्ट' नाम की एक
संस्था के गठन का फ़ैसला लिया गया। बाबा सोहन सिंह भकना और लाला
हरदयाल इसके क्रमशः अध्यक्ष और सचिव चुने गये। लाला हरदयाल नौकरी से
इस्तीफ़ा देकर अपना पूरा समय एसोसिएशन के काम में लगाने लगे।
मार्च 1913 में एसोसिएशन ने सैन फ्रांसिस्को से ग़दर नाम से एक अख़बार
निकालने का फ़ैसला किया। उसके बाद एसोसिएशन का नाम भी बदलकर 'ग़दर'
पार्टी कर दिया गया।
आगे की तरफ़ एक बड़ा क़दम
1913 में ग़दर पार्टी का गठन क्रान्तिकारी आन्दोलन के विकास की दिशा में एक
बहुत बड़ा एवं महत्त्वपूर्ण क़दम था। इसने राजनीति को धर्म से मुक्त किया और
धर्मनिरपेक्षता को अपनाया। धर्म को निजी मामला घोषित कर दिया गया।
अख़बार ग़दर ने हिन्दू-मुसलमान दोनों का आह्वान किया कि वे आर्थिक
मसलों पर ज़्यादा ध्यान दें क्योंकि उनका दोनों के जीवन पर एक जैसा प्रभाव पड़ता
है। प्लेग से हिन्दू और मुसलमान दोनों ही मर रहे हैं। अकाल पड़ने पर अन्न से
दोनों ही वंचित रहते हैं। पगार के लिए ज़ोर-ज़बरदस्ती दोनों पर की जाती है और
दोनों को ही अत्यधिक ऊँची दरों पर भू-राजस्व तथा जल-कर देना पड़ता है।
समस्या हिन्दू बनाम मुसलमान की नहीं बल्कि भारतीय बनाम अंग्रेज़ शोषकों की
है। हिन्दू-मुस्लिम एकता को इतना मज़बूत बनाया जाना चाहिए कि कोई उसे तोड़
न सके।$^{14}$
ग़दर पार्टी “धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करती थी और ठोस हिन्दू-मुस्लिम
एकता की तरफ़दार थी। वह छूत और अछूत के भेदभाव को भी नहीं मानती थी।
भारत की एकता और भारत के स्वाधीनता-संग्राम के लिए एकता, यही उसे प्रेरित
करने वाले प्रमुख सिद्धान्त थे।”$^{15}$ इस मामले में ग़दर पार्टी उस समय के भारतीय
क्रान्तिकारी आन्दोलन का वैचारिक विकास / 41