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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 788 में से

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पृष्ठ 46

ग़दर पार्टी की स्थापना
क्रान्तिकारी आन्दोलन के पहले दौर में बहुत-से क्रान्तिकारी देश छोड़कर यूरोप और
अमेरिका चले गये थे। उनका उद्देश्य था भारत में क्रान्तिकारी गतिविधियों के
संचालन के लिए धन संग्रह करना, प्रचार करना और साहसी, आत्मत्यागी तथा
समर्पित युवकों की एक टीम खड़ी करना। इस काम में उनको कुछ कम सफलता
नहीं मिली। लेकिन जहाँ तक अन्तिम लक्ष्य का प्रश्न है, उनके विचार अभी तक
भारत की आज़ादी की एक भावनात्मक धारणा तक ही सीमित थे। क्रान्ति के बाद
स्थापित होने वाली सरकार की रूपरेखा क्या होगी, दूसरे देशों की क्रान्तिकारी
शक्तियों के साथ उसके सम्बन्ध क्या होंगे, नई व्यवस्था में धर्म का क्या स्थान
होगा, आदि प्रश्नों पर उस समय के अधिकांश क्रान्तिकारी स्पष्ट नहीं थे। यह सूरत
कमोबेश 1913 तक जारी रही। इन सभी मुद्दों पर स्पष्ट रवैया अपनाने का श्रेय ग़दर
पार्टी के नेताओं को जाता है।
इस शताब्दी के पहले दशक में भारत छोड़कर जाने वाले क्रान्तिकारियों को
अंग्रेज़ सरकार के हाथों में पड़ने से बचने के लिए एक देश से दूसरे देश तक
भटकना पड़ता था। अन्त में, उनमें से कइयों ने अमेरिका में बसने और उस देश
को अपने कार्य का आधार-क्षेत्र बनाने का फ़ैसला किया। इनमें प्रमुख थे –
तारकनाथ दास, शैलेन्द्र घोष, चन्द्र चक्रवर्ती, नन्दलाल कार, बसन्तकुमार राय,
सारंगधर दास, सुधीन्द्रनाथ बोस तथा जी.डी. कुमार। पहले दशक के अन्त तक
लाला हरदयाल भी उनसे आ मिले। इन लोगों ने अमेरिका और कनाडा में बसे
भारतीय प्रवासियों से सम्पर्क किया, धन संग्रह किया, अख़बार निकाले, और कई
जगहों पर गुप्त संस्थाएँ क़ायम कीं।
तारकनाथ दास ने फ़्री हिन्दुस्तान नाम से अख़बार निकाला और अमेरिका में
रह रहे भारतीय छात्रों तथा भारतीय प्रवासियों के लिए व्याख्यान देते रहे। वे समिति
नाम की एक गुप्त संस्था के प्रधान भी थे। इस संस्था के अन्य सदस्य थे –
शैलेन्द्रनाथ बोस, सारंगधर दास, जी.डी. कुमार, लस्कर और ग्रीन नामक एक
अमेरिकी।
रामनाथ पुरी ने 1908 में ओकलैण्ड में 'हिन्दुस्तान एसोसिएशन' नाम की एक
संस्था क़ायम की, और सर्कुलर ऑफ़ फ़्रीडम नाम से एक अख़बार निकाला। ये
इस अख़बार के माध्यम से अंग्रेज़ों को भारत से खदेड़े जाने की वकालत करते रहे।
जी.डी. कुमार ने वैंकूवर से स्वदेशी सेवक नामक अख़बार निकाला। वे वहाँ की
एक गुप्त संस्था के सदस्य भी थे। इस संस्था के सदस्य रहीम और सुन्दर सिंह
भी थे। सुन्दर सिंह आर्यन नाम के एक अख़बार का सम्पादन भी करते थे और
उसके जरिये लगातार ब्रिटिश-विरोधी प्रचार चलाते थे। रहीम और आत्माराम ने
वैंकूवर में 'यूनाइटेड इण्डिया लीग' का गठन किया।
40 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़