भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 48, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंनेताओं से मीलों आगे थी। सोहन सिंह जोश के अनुसार, “ग़दर के क्रान्तिकारी
राजनीतिक-सामाजिक सुधार के सवालों पर अपने समसामयिकों से आगे थे।”¹⁶
14 मई, 1914 को ग़दर में प्रकाशित एक लेख में लाला हरदयाल ने लिखा
: “प्रार्थनाओं का समय गया; अब तलवार उठाने का समय आ गया है। हमें पण्डितों
और क़ाजियों की कोई ज़रूरत नहीं है।”¹⁷ 1913 में पोर्टलैण्ड में भाषण देते हुए
उन्होंने कहा था कि ग़दर के क्रान्तिकारियों को आगामी क्रान्ति के लिए तैयार रहना
चाहिए। उन्हें भारत जाकर और वहाँ से अंग्रेजों को भगाकर अमेरिका जैसी एक
जनतान्त्रिक सरकार क़ायम करनी चाहिए जिसमें धर्म, जाति और रंग के अन्तर से
परे सभी भारतीय समान और स्वतन्त्र हों।
लाला हरदयाल ने, जो अपनेआप को अराजकतावादी कहा करते थे, एक
बार कहा था कि स्वामी और सेवक के बीच कभी कोई समानता नहीं हो
सकती, भले ही वे दोनों मुसलमान हों, सिख हों, अथवा वैष्णव हों। अमीर
हमेशा ग़रीब पर शासन करेगा...आर्थिक समानता के अभाव में भाईचारे की बात
सिर्फ़ एक सपना है।¹⁸
हिन्दुस्तानियों के बीच साम्प्रदायिक सद्भाव बढ़ाने को ग़दर पार्टी ने अपना एक
उद्देश्य बनाया। युगान्तर आश्रम नाम के ग़दर पार्टी के दफ़्तर में सवर्ण हिन्दू, अछूत,
मुसलमान और सिख, सभी जमा होते और साथ-साथ भोजन करते थे।
धर्म जब राजनीति के साथ घुलमिल जाता है तो वह एक घातक विष बन जाता
है जो राष्ट्र के जीवन्त अंगों को धीरे-धीरे नष्ट करता रहता है, भाई को भाई से
लड़ाता है, जनता के हौसले पस्त करता है, उसकी दृष्टि को धुँधला बनाता है,
असली दुश्मन की पहचान कर पाना मुश्किल कर देता है, जनता की जुझारू
मनःस्थिति को कमज़ोर करता है, और इस तरह राष्ट्र को साम्राज्यवादी साज़िशों की
आक्रमणकारी योजनाओं का लाचार शिकार बना देता है। भारत में इस बात को
सबसे पहले ग़दर के क्रान्तिकारियों ने महसूस किया। उन्होंने दिलेरी के साथ एलान
किया कि वे इस ज़हर को अपनी राजनीति से दूर ही रखेंगे। और उन्होंने जो कहा
वैसा ही किया भी। भारतीय राजनीति में यह उनकी पहली महान उपलब्धि थी।
ग़दर के क्रान्तिकारियों की दूसरी महान उपलब्धि थी, उनका अन्तरराष्ट्रीय
दृष्टिकोण। “ग़दर का आन्दोलन एक अन्तरराष्ट्रीय आन्दोलन था। उसकी शाखाएँ
मलाया, शंघाई, इण्डोनेशिया, ईस्ट इण्डीज़, फिलीपींस, जापान, मनीला,
न्यूज़ीलैण्ड, हांगकांग, सिंगापुर, फिजी, बर्मा और दूसरे देशों में कार्यरत थीं। ग़दर
पार्टी के उद्देश्यों के प्रति इण्डस्ट्रियल वर्कर्स ऑफ़ द वर्ल्ड (आई.डब्ल्यू.डब्ल्यू.)
की बहुत हमदर्दी थी...वे (ग़दर के क्रान्तिकारी) सभी देशों की आज़ादी के
तरफ़दार थे।”¹⁹
कई कवियों की लिखी हुई कविताओं के संग्रह ग़दर दी गूँज में एक कवि
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