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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 448, कुल 788 में से

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पृष्ठ 448

सिर्फ़ यही पूर्ण स्वराज्य और सब भेदभाव ख़त्म करने में सहायक साबित हो सकता
है। देश का भविष्य नौजवानों के सहारे है। वही धरती के बेटे हैं। उनकी दुख सहने
की तत्परता, उनकी बेख़ौफ़ बहादुरी और लहराती क़ुर्बानी दर्शाती है कि भारत का
भविष्य उनके हाथ में सुरक्षित है। एक अनुभूतिमय घड़ी में देशबन्धु दास ने कहा
था, “नौजवान भारतमाता की शान एवं आशाएँ हैं। आन्दोलन के पीछे उनकी प्रेरणा
है, उनकी कुर्बानी है और उनकी जीत है। आज़ादी की राह पर मशालें लेकर चलने
वाले ये ही हैं। मुक्ति की राह पर ये तीर्थयात्री हैं।”
भारतीय रिपब्लिक के नौजवानो, नहीं सिपाहियो, क़तारबद्ध हो जाओ। आराम
के साथ न खड़े रहो और न ही निरर्थक क़दमताल किये जाओ। लम्बी दरिद्रता को,
जो तुम्हें नाकारा कर रही है, सदा के लिए उतार फेंको। तुम्हारा बहुत ही नेक मिशन
है। देश के हर कोने और हर दिशा में बिखर जाओ और भावी क्रान्ति के लिए,
जिसका आना निश्चित है, लोगों को तैयार करो। फ़र्ज़ के बिगुल की आवाज़ सुनो।
वैसे ही ख़ाली ज़िन्दगी न गँवाओ। बढ़ो, तुम्हारी ज़िन्दगी का हर पल इस तरह के
तरीक़े और तरतीब ढूँढ़ने में लगना चाहिए, कि कैसे अपनी पुरातन धरती की आँखों
में ज्वाला जागे और एक लम्बी अंगड़ाई लेकर वह जाग उठे। अंग्रेज़ साम्राज्य के
ख़िलाफ़ नवयुवकों के उर्वर हृदयों में एक उकसाहट और नफ़रत भर दो, ऐसे बीज
डालो जोकि उगें और बड़े वृक्ष बन जायें क्योंकि इन बीजों को तुम अपने गर्म ख़ून
के जल से सींचोगे। तब एक भयानक भूचाल आयेगा, जो बड़े धमाके से ग़लत
चीज़ों को नष्ट कर देगा और साम्राज्यवाद के महल को कुचलकर धूल में मिला
देगा और यह तबाही महान होगी।
तब, और सिर्फ़ तभी, एक भारतीय क़ौम जागेगी, जो अपने गुणों और शान से
इन्सानियत को हैरान कर देगी। तब चालाक और बलवान सदा से कमज़ोर लोगों
से हैरान रह जायेंगे। तभी व्यक्तिगत मुक्ति भी सुरक्षित होगी और मेहनतकश की
सरदारी और प्रभुसत्ता को सत्कारा जायेगा। हम ऐसी ही क्रान्ति के आने का सन्देश
दे रहे हैं। क्रान्ति अमर रहे!
— करतार सिंह*, अध्यक्ष
(1929) रिपब्लिकन प्रेस, अरहवन, भारत से प्रकाशित।
(*भगतसिंह का छद्म नाम)
442 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़