भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 430, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंpolicy क्या थी, आपके सम्मुख रखूँगा। इसके पश्चात actions के सम्बन्ध में
अपने विचार कहूँगा।
हम लोग कुछ दो actions कर पाये। एक साण्डर्स मर्डर, दूसरा असेम्बली बम।
इसके अतिरिक्त हमने दो-तीन और actions करने का प्रयत्न किया था यद्यपि
उनमें सफलता प्राप्त नहीं हुई। इनके सम्बन्ध में मैं इतना कह सकता हूँ कि हमारे
actions तीन प्रकार के थे – 1. Propaganda 2. Money 3. Special. इन तीनों
में से हमारा मुख्य ध्यान propaganda के actions की ओर था। बाक़ी दोनों गौण
कहे जा सकते हैं। इससे मेरा अभिप्राय उनकी importance को कम करने का नहीं
है तो भी हमारे लिए हमारी existence का उद्देश्य propaganda के actions करना
ही था। बाक़ी दोनों प्रकार के actions हमारा उद्देश्य नहीं थे, वरन उद्देश्य की पूर्ति
के लिए आवश्यक। इन तीनों को clear करने के लिए 1. Assembly action, 2.
Punjab National Bank Dacoity और 3. जोगेश चटर्जी को छुड़ाने की कोशिश
आप (शायद ‘आज’ – स.) आपके सम्मुख रखता हूँ।
पिछले दो प्रकार के actions को छोड़कर मैं propaganda actions को इस
स्थान पर discuss करना चाहता हूँ। propaganda शब्द से शायद इन actions को
ठीक-ठीक नहीं समझा जा सकता। दरअसल मतलब यह है कि हमारे ये actions
हमारी जनता के भावों के अनुकूल होते थे। उदाहरण के लिए Saunders' murder
को लो। लाला (ला. लाजपत राय) पर लाठियाँ पड़ने से हमने देखा कि देश में
इनके कारण बहुत हलचल है। इस पर Govt. के रवैये ने तेल का काम किया।
लोग बहुत नाराज़ हो गये। जनता का ध्यान revolutionaries की ओर खींचने के
लिए हमारे लिए यह बड़ा अच्छा अवसर था। पहले हमने सोचा था कि एक आदमी
पिस्तौल लेकर जाये और Scott को मारकर वहीं पर अपनेआप को पेश कर दे।
फिर Statement द्वारा यह कह दे कि National insult का बदला जब तक
revolutionaries ज़िन्दा हैं, इसी प्रकार लिया जा सकता है। किन्तु आसपास man-
power कम होने के कारण तीन आदमियों को भेजना ज़्यादा उचित समझा गया।
इसमें भी बचकर निकल जाने की आशा का विचार मुख्य नहीं था। इसकी तो आशा
भी नहीं थी। हमारा विचार यह था कि यदि murder के बाद पुलिस पीछा करे
तो खूब मुक़ाबला किया जाये। जो इस मुक़ाबले में बच जाये और पकड़ा जाये तो
Statement दे दे। इसी विचार से भागकर D.A.V. College boarding की छत पर
चढ़ गये थे। Action के समय यह प्रबन्ध था कि भगतसिंह जो Scott को पहचानता
था, पहली गोली चलाये और राजगुरु थोड़ी दूर पर उसकी हिफ़ाज़त करे। यदि
भगतसिंह पर कोई हमला करे तब राजगुरु उसको रोके। इसके बाद ये दोनों वहाँ
से भागें और चूँकि भागते हुए मुड़कर पीछा करने वालों पर निशाना नहीं लिया जा
सकता इसलिए पण्डित जी को इन दोनों की रक्षा के निमित्त पीछे खड़ा किया था।
424 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़