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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 426, कुल 788 में से

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पृष्ठ 426

बटुकेश्वर दत्त को भगतसिंह का पत्र
सेण्ट्रल जेल, लाहौर
अक्टूबर, 1930
प्रिय भाई,
मुझे सज़ा सुना दी गयी है और फाँसी का हुक्म हुआ है। इन कोठरियों में मेरे
अलावा फाँसी का इन्तज़ार करने वाले बहुत-से मुजरिम हैं। ये लोग यही प्रार्थनाएँ
कर रहे हैं कि किसी तरह वे फाँसी से बच जायें। लेकिन उनमें से शायद मैं अकेला
ऐसा आदमी हूँ जो बड़ी बेसब्री से उस दिन का इन्तज़ार कर रहा हूँ जब मुझे अपने
आदर्श के लिए फाँसी के तख़्ते पर चढ़ने का सौभाग्य मिलेगा। मैं खुशी से फाँसी
के तख़्ते पर चढ़कर दुनिया को दिखा दूँगा कि क्रान्तिकारी अपने आदर्शों के लिए
कितनी वीरता से कुर्बानी दे सकते हैं।
मुझे फाँसी की सज़ा मिली है, मगर तुम्हें उम्रक़ैद। तुम ज़िन्दा रहोगे और
ज़िन्दा रहकर तुम्हें दुनिया को यह दिखा देना है कि क्रान्तिकारी अपने आदर्शों
के लिए सिर्फ़ मर ही नहीं सकते, बल्कि ज़िन्दा रहकर हर तरह की यातनाओं
का मुक़ाबला भी कर सकते हैं। मौत सांसारिक मुसीबतों से छुटकारा पाने का
साधन नहीं बननी चाहिए, बल्कि जो क्रान्तिकारी संयोगवश फाँसी के फन्दे से
बच गये हैं उन्हें ज़िन्दा रहकर दुनिया को यह दिखा देना चाहिए कि वे न
सिर्फ़ अपने आदर्शों के लिए फाँसी पर चढ़ सकते हैं, बल्कि जेलों की अँधेरी
कोठरियों में घुट-घुटकर हद दर्जे के अत्याचारों को भी सहन कर सकते हैं।
तुम्हारा,
भगतसिंह
420 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़