भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 397, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंरहते हुए भी आपने फ़िलहाल सक्रिय आन्दोलन बन्द रखना उचित समझा है, तो
भी वह प्रस्ताव तो क़ायम ही है। इसी तरह ‘हिन्दुस्तानी सोशियलिस्ट रिपब्लिकन
पार्टी’ के नाम से ही साफ़ पता चलता है कि क्रान्तिकारियों का आदर्श
समाज-सत्तावादी प्रजातन्त्र की स्थापना करना है। यह प्रजातन्त्र मध्य का विश्राम नहीं
है। उनका ध्येय प्राप्त न हो और आदर्श सिद्ध न हो, तब तक वे लड़ाई जारी रखने
के लिए बँधे हुए हैं। परन्तु बदलती हुई परिस्थितियों और वातावरण के अनुसार वे
अपनी युद्धनीति बदलने को तैयार अवश्य होंगे। क्रान्तिकारी युद्ध जुदा-जुदा मौक़ों
पर जुदा-जुदा रूप धारण करता है। कभी वह प्रकट होता है, कभी गुप्त, कभी
केवल आन्दोलन-रूप होता है, और कभी जीवन-मरण का भयानक संग्राम बन
जाता है। ऐसी दशा में क्रान्तिकारियों के सामने अपना आन्दोलन बन्द करने के लिए
विशेष कारण होने चाहिए। परन्तु आपने ऐसा कोई निश्चित विचार प्रकट नहीं किया।
निरी भावपूर्ण अपीलों का क्रान्तिकारी युद्ध में कोई विशेष महत्त्व नहीं होता, हो नहीं
सकता।
आपके समझौते के बाद आपने अपना आन्दोलन बन्द किया है, और
फलस्वरूप आपके सब क़ैदी रिहा हुए हैं। पर क्रान्तिकारी क़ैदियों का क्या? 1915
ई. से जेलों में पड़े हुए ग़दर-पक्ष के बीसों क़ैदी सज़ा की मियाद पूरी हो जाने पर
भी अब तक जेलों में सड़ रहे हैं। मार्शल लॉ के बीसों क़ैदी आज भी ज़िन्दा क़ब्रों
में दफ़नाये पड़े हैं। यही हाल बब्बर अकाली क़ैदियों का है। देवगढ़, काकोरी,
मछुआ-बाज़ार और लाहौर षड्यन्त्र के क़ैदी अब तक जेल की चहारदीवारी में बन्द
पड़े हुए बहुतेरे क़ैदियों में से कुछ हैं। लाहौर, दिल्ली, चटगाँव, बम्बई, कलकत्ता
और अन्य जगहों में कोई आधी दर्जन से ज़्यादा षड्यन्त्र के मामले चल रहे हैं।
बहुसंख्यक क्रान्तिवादी भागते फिरते हैं, और उनमें कई तो स्त्रियाँ हैं। सचमुच आधी
दर्जन से अधिक क़ैदी फाँसी पर लटकने की राह देख रहे हैं। इन सबका क्या?
लाहौर षड्यन्त्र केस के सज़ायाफ़्ता तीन क़ैदी, जो सौभाग्य से मशहूर हो गये हैं और
जिन्होंने जनता की बहुत अधिक सहानुभूति प्राप्त की है, वे कुछ क्रान्तिवादी दल
का एक बड़ा हिस्सा नहीं हैं। उनका भविष्य ही उस दल के सामने एकमात्र प्रश्न
नहीं है। सच पूछा जाये तो उनकी सज़ा घटाने की अपेक्षा उनके फाँसी पर चढ़ जाने
से ही अधिक लाभ होने की आशा है।
यह सब होते हुए भी आप उन्हें अपना आन्दोलन बन्द करने की सलाह देते
हैं। वे ऐसा क्यों करें? आपने कोई निश्चित वस्तु की ओर निर्देश नहीं किया है। ऐसी
दशा में आपकी प्रार्थनाओं का यही मतलब होता है कि आप इस आन्दोलन को
कुचल देने में नौकरशाही की मदद कर रहे हैं, और आपकी विनती का अर्थ उनके
दल को द्रोह, पलायन और विश्वासघात का उपदेश करना है। यदि ऐसी बात नहीं
है, तो आपके लिए उत्तम तो यह था कि आप कुछ अग्रगण्य क्रान्तिकारियों के पास
जेल की सलाख़ों के पीछे से / 391