भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 384, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंमें होने वाली जाँच-पड़ताल होने से पहले भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। सामान्य
समझ वाले साधारण व्यक्ति की समझ में भी यह बात आ सकती है कि इस
मुक़दमे का भूख हड़ताल से कोई सम्बन्ध नहीं है। भूख हड़ताल आरम्भ करने के
कुछ विशेष कारण थे, इस स्थिति में सरकार को उन कारणों के बारे में स्पष्टीकरण
देना था जिसके आधार पर भूख हड़ताल की गयी थी। जब सरकार ने इस समस्या
को सुलझाने के लिए कुछ प्रबन्ध करने की स्वीकृति दी और जेल जाँच कमेटी
स्थापित की तब हमने भूख हड़ताल समाप्त की थी। लेकिन सबसे पहले हमें यह
बताया गया था कि यह समस्या नवम्बर तक सुलझा दी जायेगी लेकिन उसमें
दिसम्बर तक विलम्ब किया गया। जनवरी भी बीत गयी लेकिन इस बात का कोई
संकेत नहीं मिल रहा कि सरकार वास्तव में इस सम्बन्ध में कुछ करेगी भी या
नहीं। हमें लगा कि मामला समाप्त कर दिया गया है। इन स्थितियों में हमने पूरे एक
हफ़्ते का नोटिस देकर 4 फ़रवरी, 1930 से पुनः भूख हडताल आरम्भ कर दी।
इसके बाद ही सरकार ने इस समस्या को अन्तिम रूप से हल करने के लिए कुछ
क़दम उठाये।
इस आशय का एक विज्ञापन फिर सरकार ने समाचारपत्रों में जारी किया। तब
हमने भूख हड़ताल समाप्त कर दी। यहाँ तक कि हमने इस बात का इन्तज़ार भी
नहीं किया कि सरकार अपने अन्तिम निर्णय लागू करती भी है या नहीं? लेकिन
आज ही हमने यह महसूस किया है कि अंग्रेज़ सरकार ऐसे साधारण मामलों में भी
झूठ और फ़रेब का सहारा लेने से बाज़ नहीं आयी। वह विज्ञापन ख़ास निश्चित और
निर्णय निकालने वाले आधार पर निर्धारित थे, लेकिन हमने देखा कि उस पर भी
विपरीत अमल किया गया। जो भी हो, इस विषय पर बहस करने का यह उचित
अवसर नहीं। अगर यह मामला पुनः कभी उठा तो हम इसका अवश्य निर्णय करेंगे।
लेकिन हम पुरज़ोर कहना चाहते हैं कि भूख हड़ताल का उद्देश्य इसतगासा की
कार्यवाही के विरुद्ध कोई क़दम नहीं था, ऐसे साधारण कारणों से हमने इतनी
यातनाएँ नहीं सही थीं। यतीन्द्रनाथ दास ने इतने सामान्य कारण के लिए अपने
जीवन का बलिदान नहीं दिया, राजगुरु और सुखदेव ने भी इस बचाव के लिए ही
अपने जीवन संकट में नहीं डाले थे।
आप स्वयं हमारे मुक़दमे के सन्दर्भ में यह अच्छी तरह जानते थे कि अध्यादेश
जारी करने की वजह भूख हड़ताल नहीं थी। लेकिन असल कारण तो कुछ और
हैं जिनके बारे में सोचकर आपकी सरकार के होश-हवास गुम हो गये। न तो वे
इस मुक़दमे में विलम्ब के कारण हुए और न ही कोई ऐसी संकटमय स्थिति पैदा
हुई, जिसके कारण इस बेक़ानून के क़ानून के ऊपर हस्ताक्षर किये। ज़रूर ही इसके
पीछे कुछ और है।
लेकिन हम यह बता देना चाहते हैं कि उन अध्यादेशों से हमारी भावनाओं को
378 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़