भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 38, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकम्युनिस्ट इण्टरनेशनल के दस्तावेज़ों में प्रस्तुत विश्लेषणों-निष्कर्षों को आधार
बनाकर भारतीय परिस्थितियों को देखने और कार्यभार तय करने के बजाय स्वयं
अपनी दृष्टि और अध्ययन के आधार पर ब्रिटिश उपनिवेशवाद, कांग्रेस, गाँधी आदि
के बारे में मूल्यांकन बनाये। अप्रोच की यह मौलिकता विशेष रूप से हमारे देश
में उल्लेखनीय है जहाँ बड़ी पार्टियों और अन्तरराष्ट्रीय नेतृत्व का अन्धानुकरण
लगातार एक गम्भीर बीमारी के रूप में मौजूद रहा है। इस मायने में भगतसिंह,
भगवतीचरण वोहरा आदि की विकास-प्रक्रिया माओ त्से-तुङ और हो ची मिन्ह के
अधिक निकट जान पड़ती है जिन्होंने अन्तरराष्ट्रीय नेतृत्व से सीखते हुए भी,
अपने-अपने देशों की ठोस परिस्थितियों का स्वयं अध्ययन किया और क्रान्ति की
रणनीति, आम रणकौशल और मार्ग का निर्धारण किया। ऐसा सोचने का वस्तुगत
आधार है कि यदि भगतसिंह जीवित रहे होते और उन्हें अपनी सोच के आधार पर
कम्युनिस्ट पार्टी बनाने या कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल होकर उसे अपनी सोच के
हिसाब से दिशा देने का अवसर मिला होता तो शायद इस देश के कम्युनिस्ट
आन्दोलन का इतिहास, या शायद इस देश का ही इतिहास किसी और ढंग से लिखा
जाता।
बहरहाल, आज ऐसा सोचने की एकमात्र प्रासंगिकता यही हो सकती है कि
क्रान्तिकारी विचार और कर्म की उस अधूरी यात्रा को एक बार फिर आगे बढ़ाने
और अंजाम तक पहुँचाने की बेचैनी से हर प्रगतिगामी भारतीय युवा के दिल को
लबरेज़ कर दिया जाये। भगतसिंह के ही सन्देश को आधार बनाकर जन-जन तक
इस सन्देश को पहुँचाना होगा कि यही साम्राज्यवाद और पूँजीवाद के विरुद्ध
निर्णायक संघर्ष का वह ऐतिहासिक काल है जिसकी भविष्यवाणी भगतसिंह ने की
थी। कांग्रेसी नेतृत्व ने राष्ट्रीय आन्दोलन को आधी सदी पहले एक ऐसे मुकाम तक
पहुँचाया, जब पूँजीवादी शासन के रूप में हमें अधूरी, खण्डित और विकलांग
आज़ादी मिली और तबसे लेकर आज तक इतिहास एक अँधेरी सुरंग का दुखदायी
सफ़रनामा बनकर रह गया। अब एक बार फिर, जैसाकि भगतसिंह ने कहा था, हमें
“क्रान्ति की तलवार विचारों की सान पर तेज़” करनी होगी और साम्राज्यवाद-
पूँजीवाद विरोधी नयी समाजवादी क्रान्ति का सन्देश कल-कारख़ानों-झोंपड़ियों
तक, मेहनतकशों के अँधेरे संसार तक, हर जीवित हृदय तक लेकर जाना होगा।
भगतसिंह का नाम आज इसी संकल्प का प्रतीक चिह्न है और उनका चिन्तन
क्षितिज पर अनवरत जलती मशाल की तरह हमें प्रेरित कर रहा है और दिशा
दिखला रहा है।
– सत्यम
10 जनवरी, 2006
32 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़