भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 37, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंविजयकुमार सिन्हा आदि भी मेधावी और अध्ययनशील युवा थे, लेकिन चिन्तन
के क्षेत्र में भगवतीचरण वोहरा भगतसिंह के सर्वाधिक क़रीबी थे। उल्लेखनीय
है कि भगतसिंह से गहन विचार-विमर्श के बाद नौजवान भारत सभा और
एच.एस.आर.ए. का घोषणापत्र भगवतीचरण वोहरा ने ही तैयार किया था। वह
भगतसिंह की विचार-यात्रा के अनन्य सहयात्री थे।
भगतसिंह और उनके साथियों की राजनीतिक-वैचारिक समझ 1917 की
रूसी सर्वहारा क्रान्ति के प्रखर रक्तिम आलोक से आलोकित हुई थी। 'युगान्तर'
और 'अनुशीलन' से लेकर 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' तक के मध्यवर्गीय
अराजकतावादी क्रान्तिकारी आन्दोलन के विकासक्रम की गहराई से जाँच-पड़ताल
करने, मज़दूरों-किसानों को संगठित करने की महत्ता को समझने और फिर
वैज्ञानिक समाजवाद को स्वीकारने की मंज़िल तक पहुँचने के पीछे भगतसिंह और
भगवतीचरण वोहरा की महान प्रतिभा का योगदान तो था ही, लेकिन साथ ही,
इसके कुछ सुनिश्चित वस्तुगत ऐतिहासिक कारण भी थे। इस वैचारिक विकास के
पीछे ग़दर पार्टी के निकट अतीत की भूमिका काफ़ी महत्त्वपूर्ण थी। ग़दर पार्टी वह
पहली क्रान्तिकारी पार्टी थी जिसमें किसानों और मज़दूरों की भूमिका और
जनान्दोलनों की भूमिका को सशस्त्र क्रान्ति से जोड़ने की सोच मौजूद थी और जो
एक जनवादी गणतन्त्र की स्थापना की सुनिश्चित अवधारणा प्रस्तुत कर रही थी।
यह अनायास नहीं था कि आगे चलकर ग़दर पार्टी के अधिकांश क्रान्तिकारी
कम्युनिस्ट आन्दोलन में शामिल हो गये। ग़दर पार्टी के संस्थापक लाला हरदयाल
की विश्लेषण पद्धति में काफ़ी हद तक जुझारू भौतिकवादी वर्ग-विश्लेषण के तत्त्व
समाहित थे। भगतसिंह और उनके साथियों ने अजीत सिंह, लाला हरदयाल और
करतार सिंह सराभा की क्रान्तिकारी जनवादी परम्परा को आगे विस्तार दिया और उसे
मार्क्सवाद की मंज़िल तक उसी तरह आगे बढ़ाया जिस तरह रूस में प्लेख़ानोव
और वेरा ज़ासूलिच आदि की पीढ़ी नरोदवाद की क्रान्तिकारी जनवादी विरासत से
आगे बढ़कर मार्क्सवाद तक पहुँची। अन्तर सिर्फ़ यह था कि भगतसिंह,
भगवतीचरण वोहरा आदि को अपने मार्क्सवादी चिन्तन को सुव्यवस्थित ढंग से आगे
बढ़ाने और उसे अमल में लाने का अवसर ही नहीं मिला।
भगतसिंह की मार्क्सवाद तक की यात्रा एम.एन. राय और अन्य विलायतपलट
भारतीय कम्युनिस्ट नेताओं से भिन्न थी। उन्होंने मार्क्सवादी क्लासिक्स का अध्ययन
किया और इस प्रक्रिया में विकसित होती हुई दृष्टि से भारतीय समाज और राजनीति
का मौलिक विश्लेषण करने की कोशिश की। यह कोशिश चाहे जितनी भी छोटी
और अनगढ़ रही हो, पर इसकी मौलिकता और इसके विकास की तीव्र गति
सर्वाधिक उल्लेखनीय थी। भगतसिंह और उनके साथियों ने भारत के प्रारम्भिक
कम्युनिस्ट नेतृत्व की तरह सोवियत संघ और ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टियों तथा
भगतसिंह की वैचारिक विरासत और हमारा समय / 31