भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 372, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकी जेलों के इंस्पेक्टर जनरलों की बैठक लखनऊ में अभी समाप्त हुई है। अखिल
भारतीय सरकारी कॉन्फ्रेंस का विचार-विमर्श दिल्ली में हुआ है। अखिल भारतीय
कॉन्फ्रेंस पिछले दिसम्बर महीने में हुई थी। एक माह से अधिक बीत चुका है,
लेकिन सरकार ने अभी तक एक भी सिफ़ारिश लागू नहीं की। इस तरह के
लटकाये रखने वाले व्यवहार में दूसरों की तरह हमें भी इस बात का भय है कि
सम्भवतः इस सवाल को एक ओर कर दिया गया है। पिछले चार महीनों में जिस
प्रकार भूख हड़तालों और राजनीतिक बन्दियों के साथ प्रतिशोधात्मक व्यवहार
हुआ है, उससे हमारी आशंका और पक्की हुई है। जो यातनाएँ राजनीतिक बन्दियों
को दी जा रही हैं, उनके सम्बन्ध में पूरी जानकारी होना हमारे लिए बहुत कठिन
है लेकिन फिर भी जेल की चारदीवारी में से जो थोड़ी-बहुत सूचनाएँ हमें मिल
सकती हैं वे हमें वस्तुस्थिति से परिचित कराने के लिए पर्याप्त हैं। ऐसे ही कुछ
उदाहरण हम नीचे दे रहे हैं, जिनमें हम विचलित हुए बिना नहीं रह सके और जो
सरकारी आश्वासनों में मेल नहीं खाते -
- श्रीयुत ब.क. बनर्जी, जो दक्षिणेश्वर बम केस के सम्बन्ध में लाहौर सेण्ट्रल
जेल में पाँच बरस की सज़ा भुगत रहे हैं, गत वर्ष आम भूख हड़ताल में शामिल
हो गये। उनकी सज़ा के हिसाब से उनकी रिहाई पिछले दिसम्बर माह में हो जानी
थी, लेकिन अब चार माह के लिए टाल दी गयी है। इस जेल में लाहौर साज़िश
के सम्बन्ध में आजीवन बन्दी की सज़ा भुगत रहे सत्तर वर्षीय वृद्ध बाबा सोहन
सिंह¹ को सज़ा दी गयी है। इसके अलावा अन्यों में से मियाँवाली जेल में बन्द
सरदार काबल सिंह² और सरदार गोपाल सिंह³ को आम भूख हड़ताल में शामिल
होने के कारण सज़ाएँ दी गयी हैं। इनमें से अनेक मामलों में कैद बढ़ा दी गयी है,
जबकि कुछ स्पेशल क्लास से हटा दिये गये हैं। - इसी अपराध में अर्थात आम भूख हड़ताल में शामिल होने के कारण आगरा
सेण्ट्रल जेल में बन्द सर्वश्री शचीन्द्रनाथ सान्याल, रामकृष्ण खत्री, सुरेश चन्द्र
भट्टाचार्य, रामकुमार सिन्हा, शचीन्द्रनाथ बख्शी, मन्मथनाथ गुप्त तथा काकोरी
केस के अनेक बन्दियों को सख़्त सज़ाएँ दी गईं। विश्वस्त सूत्र से पता चला है कि
श्री सान्याल को बेड़ियाँ डालकर एकान्त कोठरी में रखा गया है, जिसके कारण
उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया है। उनका वज़न 18 पौण्ड कम हो गया है। मालूम हुआ
कि श्री भट्टाचार्य तपेदिक के मरीज हैं। बरेली जेल के तीन बन्दियों को भी सज़ाएँ
दी गयी हैं। उनकी समस्त सुविधाएँ वापस ले ली गयीं। यहाँ तक कि अपने - बाबा सोहन सिंह भकना, (1867-1968), ग़दर पार्टी के पहले अध्यक्ष
- काबल सिंह गोविन्दपुरी
- गोपाल सिंह क़ौमी
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