भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 371, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंगृह मन्त्रालय, भारत सरकार को स्मरणपत्र
द्वारा,
स्पेशल मजिस्ट्रेट, लाहौर षड्यन्त्र केस, लाहौर
28 जनवरी, 1930
20 जनवरी, 1930 के हमारे तार के सन्दर्भ में, जो नीचे दिया जा रहा है, हमें कोई
उत्तर नहीं दिया गया –
गृह सदस्य भारत सरकार, दिल्ली–लाहौर साज़िश केस के विचाराधीन
(अण्डर ट्रायल) बन्दियों ने इस आश्वासन पर भूख हड़ताल स्थगित की थी कि
सरकार जेल कमेटी की सिफ़ारिशों पर विचार कर रही है। अखिल भारतीय
सरकारी कॉन्फ़्रेंस समाप्त हो गयी लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी
– राजनीतिक बन्दियों के साथ प्रतिशोधात्मक व्यवहार अभी भी किया जा रहा है।
निवेदन है कि लाहौर साज़िश केस के बन्दियों के बारे में सरकार हमें अपने अन्तिम
निर्णय से एक हफ़्ते में अवगत करा दे।
जिस प्रकार उपरोक्त तार में संक्षेप में बताया है, आपके ध्यान में हम यह लाना
चाहते हैं कि पंजाब की जेलों में बन्द लाहौर साज़िश के बन्दियों और प्रत्येक
राजनीतिक बन्दी को पंजाब जेल जाँच कमेटी के सदस्यों के इस आश्वासन से कि
बहुत जल्द ही राजनीतिक बन्दियों के व्यवहार का प्रश्न हमारी तसल्ली के अनुसार
हल किया जा रहा है, भूख हड़ताल स्थगित कर दी। महान शहीद यतीन्द्रनाथ दास
की शहादत के बाद यह मामला लेजिस्लेटिव असेम्बली में उठा और सर जेम्स
कर्रीर ने सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दिया कि अब मन बदल गया है। और
तभी यह कहा गया था कि राजनीतिक कैदियों के साथ व्यवहार के प्रश्न पर उन्हें
बहुत सहानुभूति है। ऐसे राज–बन्दियों ने जो देश के भिन्न-भिन्न भागों की जेलों
में भूख हड़ताल पर थे, उस समय – उपरोक्त आश्वासन और कुछ बन्दियों की
बदतर हालत को सामने रखकर पास किये गये अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के
पारित प्रस्ताव और निवेदन पर – अपनी हड़ताल स्थगित कर दी थी। उस समय
से सभी स्थानीय सरकारों ने अपनी सिफ़ारिशें पेश कर दी हैं। अलग-अलग राज्यों
जेल की सलाख़ों के पीछे से / 365