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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 327, कुल 788 में से

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पृष्ठ 327

: "Our national movement must become a purifying mass movement. If it is
to fulfil its destiny without falling into class war one of the dangers of
Bolshevism."
अर्थात हमें अपने राष्ट्रीय जन-आन्दोलन को देश-सुधार का आन्दोलन बना
देना चाहिए। तभी हम वर्गयुद्ध के बोल्शेविज़्म के ख़तरों से बच सकेंगे। वह इतना
कहकर ही कि ग़रीबों के पास जाओ, गाँवों की ओर जाओ, उनको दवा-दारू मुफ़्त
दो – समझते हैं कि हमारा कार्यक्रम पूरा हो गया। वे छायावादी कवि हैं। उनकी
कविता का कोई विशेष अर्थ तो नहीं निकल सकता, मात्र दिल का उत्साह बढ़ाया
जा सकता है। बस पुरातन सभ्यता के शोर के अलावा उनके पास कोई कार्यक्रम
नहीं। युवाओं के दिमाग़ों को वे कुछ नया नहीं देते। केवल दिल को भावुकता से
ही भरना चाहते हैं। उनका युवाओं में बहुत असर है। और भी पैदा हो रहा है। उनके
दकियानूसी और संक्षिप्त-से विचार यही हैं जोकि हमने ऊपर बताये हैं। उनके
विचारों का राजनीतिक क्षेत्र में सीधा असर न होने के बावजूद बहुत असर पड़ता
है। विशेषकर इस कारण कि नौजवानों, युवाओं को ही कल आगे बढ़ना है और
उन्हीं के बीच इन विचारों का प्रचार किया जा रहा है।
अब हम श्री सुभाषचन्द्र बोस और श्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों पर आ
रहे हैं। दो-तीन महीनों से आप बहुत-सी कॉन्फ़्रेंसों के अध्यक्ष बनाये गये और आपने
अपने-अपने विचार लोगों के सामने रखे। सुभाष बाबू को सरकार तख़्तापलट गिरोह
का सदस्य समझती है और इसीलिए उन्हें बंगाल अध्यादेश के अन्तर्गत क़ैद कर
रखा था। आप रिहा हुए और गर्म दल के नेता बनाये गये। आप भारत का आदर्श
पूर्ण स्वराज्य मानते हैं, और महाराष्ट्र कॉन्फ़्रेंस में अध्यक्षीय भाषण में आपने इसी
प्रस्ताव का प्रचार किया।
पण्डित जवाहरलाल नेहरू स्वराज पार्टी के नेता पण्डित मोतीलाल नेहरू जी
के सुपुत्र हैं। बैरिस्टरी पास हैं। आप बहुत विद्वान हैं। आप रूस आदि का दौरा कर
आये हैं। आप भी गर्म दल के नेता हैं और मद्रास कॉन्फ़्रेंस में आपके और आपके
साथियों के प्रयासों से ही पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव स्वीकृत हो सका था। आपने
अमृतसर कॉन्फ़्रेंस के भाषण में भी इसी बात पर ज़ोर दिया। लेकिन फिर भी इन
दोनों सज्जनों के विचारों में ज़मीन-आसमान का अन्तर है। अमृतसर और महाराष्ट्र
कॉन्फ़्रेंसों के इन दोनों अध्यक्षों के भाषण पढ़कर ही हमें इनके विचारों का अन्तर
स्पष्ट हुआ था। लेकिन बाद में बम्बई के एक भाषण में यह बात स्पष्ट रूप से
हमारे सामने आ गयी। पण्डित जवाहरलाल नेहरू इस जनसभा की अध्यक्षता कर
रहे थे और सुभाषचन्द्र ने भाषण किया। वह एक बहुत भावुक बंगाली हैं। उन्होंने
भाषण आरम्भ किया कि हिन्दुस्तान का दुनिया के नाम एक विशेष सन्देश है। वह
दुनिया को आध्यात्मिक शिक्षा देगा। खैर, आगे वे दीवाने की तरह कहना आरम्भ
नौजवान भारत सभा और राष्ट्रीय नेतृत्व का मूल्यांकन / 321